डाकामा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भारत के मानचित्र में गलती दिखाने पर IFS अधिकारी पूजा कुमर झा ने तुरंत विरोध किया। उनके इस कदम ने भारत की संप्रभुता की पंक्ति को दृढ़ता से दोहराया और सोशल मीडिया में सराहना बटोरी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- डाकामा हुई सेमिनार में भारत का मानचित्र गलत दिखा
- IFS अधिकारी पूजा कुमर झा ने तुरंत विरोध कर राष्ट्रीय स्थिति को दोहराया
- उनकी प्रतिक्रिया ने युवा वर्ग में प्रेरणा का स्रोत बना
डाकामा स्थित बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय एवं रणनीतिक अध्ययन संस्थान (BIISS) में आयोजित एक सेमिनार के दौरान, एक प्रस्तुति में भारत का मानचित्र दिखाया गया जिसमें जम्मू‑कश्मीर को पाकिस्तान के भाग के रूप में दर्शाया गया था। इस त्रुटि को देखते ही, भारतीय विदेश सेवा (IFS) की द्वितीय सचिव पूजा कुमर झा ने तुरंत मंच पर हस्तक्षेप किया और कहा, “भारत का प्रदर्शित मानचित्र गलत है। जम्मू‑कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।”
सेमिनार का माहौल और प्रतिक्रिया
सेमिनार में बांग्लादेश के विदेश मंत्री शमा ओबेद सहित कई कूटनीतिक प्रतिनिधि और विद्वान उपस्थित थे। प्रस्तुति दे रहे थे पूर्व बांग्लादेशी राजनयिक अहमद तारीक करीम, जिनके शब्दों के बीच इस मानचित्र त्रुटि ने भारतीय प्रतिनिधि को तुरंत कार्रवाई करने का अवसर दिया। पूजा झा की तेज़ प्रतिक्रिया ने न केवल मंच पर उपस्थित सभी को चकित किया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
पूजा झा की पृष्ठभूमि और करियर
पूजा कुमर झा 2022 बैच की IFS अधिकारी हैं और वर्तमान में बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव (राजनीति एवं सूचना) के रूप में नियुक्त हैं। उन्होंने 2021 में प्रथम प्रयास में UPSC सिविल सेवाओं की परीक्षा दे कर ऑल इंडिया रैंक 82 प्राप्त किया। बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुरनहिया गाँव से आने वाली वह दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनके पिता लगभग चार दशकों से ग्रुगरहाम में एक निजी कंपनी में सहायक का कार्य करते हैं, जबकि माँ गृहिणी हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, परिवार ने सभी बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का दृढ़ संकल्प रखा।
सामाजिक बाधाओं को पार करने की कहानी
एक पाँचवीं बेटी के रूप में, पूजा ने अपने बचपन में लिंगभेद के सामाजिक दबावों को प्रत्यक्ष देखा। उन्होंने कहा कि वह अपने शिक्षा और करियर के माध्यम से इस सामाजिक पूर्वाग्रह को चुनौती देती हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने के बाद भी उन्होंने लगातार शैक्षणिक उत्कृष्टता हासिल की, जिससे वह आज राष्ट्रीय मंच पर भारत की संप्रभुता की रक्षा कर रही हैं।
भविष्य की दिशा और प्रभाव
डाकामा इस घटना ने न केवल भारत‑बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दे को उजागर किया, बल्कि भारतीय युवाओं, विशेषकर लड़कियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। जैसे-जैसे भारत अपनी सीमा की रक्षा में दृढ़ता दिखा रहा है, इस प्रकार के कूटनीतिक कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेंगे।