केरळ में विशेष तीव्र पुनरावृत्ति (SIR) के दो हफ्ते बाद, चुनाव आयोग ने 7 लाख से अधिक नामों को अनकटे गणना फॉर्म (UEF) श्रेणी में वर्गीकृत किया। सबसे अधिक इस श्रेणी में बीबीएमपी साउथ जिले में दर्ज है, जहाँ 3.3 लाख मतदाता अनकटे फॉर्म के तहत आए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केरळ के SIR में 7 लाख से अधिक नाम UEF में टैग हुए
- सबसे बड़ा समूह 4.15 लाख स्थायी रूप से स्थान बदलने वाले मतदाता
- बीबीएमपी साउथ में सबसे अधिक अनकटे नाम, कुल 3.3 लाख
केरळ में विशेष तीव्र पुनरावृत्ति (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के दो हफ्ते बीत जाने के बाद, निर्वाचन आयोग ने मतदान सूची में 7 लाख से अधिक नामों को "अनकटे एन्क्यूमरेशन फॉर्म" (Uncollected Enumeration Form – UEF) की श्रेणी में वर्गीकृत किया। यह कदम अंतिम मतदाता सूची को 7 अक्टूबर को प्रकाशित करने से पहले साफ‑सुथरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सभी प्रमुख वर्गीकरण
प्रकाशित SIR स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा समूह 4.15 लाख मतदाता है, जिन्हें "स्थायी स्थानांतरण" के रूप में चिह्नित किया गया है। इसका अर्थ है कि ये मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र से स्थायी रूप से बाहर चले गए हैं, परंतु उनका फॉर्म अभी तक एकत्र नहीं हुआ। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा समूह "मृत्यु" (UEF Death) है, जिसमें लगभग 2.05 लाख नाम शामिल हैं। अन्य वर्गों में "पहले से ही नामांकित" (35,838), "अनुपस्थित" (79,146) और "अन्य" (2,314) शामिल हैं।
भौगोलिक वितरण
बीबीएमपी साउथ, जो बेंगलुरु शहरी जिले के चार चुनावी उपखंडों में से एक है, में अनकटे फॉर्म वाले नामों का लगभग एक‑तीहाई हिस्सा है – कुल 3.3 लाख मतदाता। इसके बाद बेंगलुरु शहरी (Bangalore Urban) में 1.07 लाख, और बीबीएमपी सेंट्रल में 88,549 नाम आते हैं। यह वितरण शहरी क्षेत्रों में तेज़ जनसंख्या परिवर्तन और प्रवासन को दर्शाता है।
प्रक्रिया की प्रगति
SIR 30 जून से 29 जुलाई तक चल रहा था, जिसमें बूथ‑स्तरीय अधिकारी (BLO) ने 5.54 करोड़ मतदाताओं को एन्क्यूमरेशन फॉर्म वितरित किए। रविवार तक 5.15 करोड़ यानी 92.9% मतदाताओं ने फॉर्म प्राप्त कर लिया, जबकि 1.44 करोड़ फॉर्म (लगभग 26%) को डिजिटल रूप में बदला गया।
आगे की राह और विरोध
पहले चरण के बाद ड्राफ्ट वोटर सूची 5 अगस्त को प्रकाशित होगी, और 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दायर की जा सकती हैं। इस प्रक्रिया के बाद SIR नोटिस चरण में प्रवेश करेगा, जहाँ सभी दावे और आपत्तियों का निपटा जाएगा। विपक्षी दल, विशेषकर भाजपा और जेडी(एस), ने इस प्रक्रिया की वैधता को लेकर कई शिकायतें दर्ज करवाई हैं, यह तर्क देते हुए कि फॉर्म वितरण दरवाज़ा‑दरवाज़ा नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जो आयोग के निर्देशों के विरुद्ध है।
इन आँकड़ों से पता चलता है कि शहरी भारत में जनसंख्या गतिशीलता, आयु‑समूह परिवर्तन, और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है। यदि इस SIR को सफलतापूर्वक पूरा किया गया, तो अगले राज्य चुनावों में मतदाता सूची की विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है।