बाहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कहा कि विपक्ष दलित संगठनों का प्रयोग करके बहुजन वर्ग को भटकाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस ने जवाब में कहा कि यह बयान भाजपा के प्लेबुक को दोहराता है और बहुजन आंदोलन को कमजोर कर रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मायावती ने विपक्ष को दलित संगठनों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया
  • कांग्रेस ने इस बयान को भाजपा के प्लेबुक से तुलना की
  • मृतक ललिता गौतम के मामले ने राजनीतिक तनाव को बढ़ाया

लखनऊ, 12 जुलाई 2026 – बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती ने आज एक विस्तृत ट्वीट में कहा कि विपक्षी दलों ने दलित संगठनों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया है और बहुजन समाज को भ्रमित किया है। उन्होंने यह आरोप कई मौकों पर किए गए प्रदर्शनों, सड़क जाम और झूठे वादों को लेकर लगाया, जिन्हें उन्होंने “राजनीतिक गिमिक” कहा।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक माहौल

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज़ हो रही है। इस दौरान दलित एवं पिछड़े वर्गों का समर्थन जीतना सभी प्रमुख पार्टियों के लिए रणनीतिक लक्ष्य बन चुका है। बीएसपी ने हमेशा खुद को अंबेडकरवादी, गैर-हिंसक और विकास‑उन्मुख पार्टी के रूप में पेश किया है, जबकि भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों ने भी इसी वर्ग को आकर्षित करने के लिए कई बार विरोध प्रदर्शनों का सहारा लिया है।

मायावती का विस्तृत बयान

मायावती ने अपने X (Twitter) पोस्ट में लिखा, “बीएसपी कभी भी धरना‑प्रदर्शन, सड़क जाम या सरकारी‑निजी संपत्तियों को तोड़‑फोड़ नहीं करता। हम ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर काम करते हैं, जो हमारे चार बार के उत्तर प्रदेश शासन में स्पष्ट है।” उन्होंने यह भी कहा कि विरोधी दल “कछुए के आँसू” नहीं बहाते और “रंग बदलने वाले गिरगिट” नहीं बनते।

ललिता गौतम की हत्या और उसका राजनीतिक असर

मायावती का बयान ललिता गौतम के हत्याकांड के बाद आया, जिसमें 20‑साल की बीए छात्रा का शरीर मीरूत के रोहटा में मिला था। केस में आरोपी को बैंल पर रिहा किया गया, जिससे दलित समूहों और परिवार ने दोबारा जांच की मांग की। इस मुद्दे पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और कई लोगों को हिरासत में लिया, जिससे विरोधी पार्टियों के बीच तनाव बढ़ा। कांग्रेस के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद और आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख ने भी पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की, लेकिन स्थिति जटिल बनी रही।

कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “मायावती का बयान भाजपा के प्लेबुक को दोहराता है और बहुजन तथा हाशिए पर रहने वाले वर्गों के संघर्ष को कमजोर करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपने अधिकारों के लिए शांति‑पूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है और यह अधिकार किसी भी पार्टी द्वारा दबाया नहीं जाना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप‑प्रतिकार से उत्तर प्रदेश में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, विशेषकर जब दलित और पिछड़े वर्गों की आवाज़ें बढ़ती जा रही हैं। यदि पार्टी‑आधारित विभाजन जारी रहता है, तो सामाजिक समरसता और विकास के लिए दीर्घकालिक नुकसान की संभावना है।