जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की राज्यता बहाली में देरी को लेकर कड़ी निंदा की। उन्होंने दिल्ली के जंतर mantar में 20 जुलाई को प्रदर्शन करने की घोषणा की और मोदी सरकार को अपने वादे पर कायम रहने की याद दिलाई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ओमर अब्दुल्ला ने राज्यता बहाली में देरी को लेकर केंद्र को तीखा सवाल किया
  • जंतर mantar में 20 जुलाई को राष्ट्रीय कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन तय
  • प्रधानमंत्री मोदी के कत्रा वादे को लागू करने की माँग की गई

जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने रविवार को जम्मू में आयोजित एक भीड़भाड़ वाले सभाकक्ष में केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, “हमारी सहनशीलता खत्म हो रही है; पहले कहा गया कि विधानसभा में उठाने से राज्यता नहीं मिलेगी, फिर कहा गया कि जामु‑कश्मीर में प्रदर्शन से नहीं, और अब जंतर mantar में भी नहीं। क्या हमें डोनाल्ड ट्रम्प के पास जाना पड़ेगा?” यह टिप्पणी भाजपा नेताओं द्वारा प्रकट किए गए “निरर्थक” बयान के जवाब में कही गई थी।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने के बाद जम्मू‑कश्मीर को संघीय प्रदेश में बदल दिया गया था, जिससे कई स्थानीय नेता और जनता असंतोष व्यक्त कर रहे थे। राष्ट्रीय कांग्रेस (एनसी) ने लगातार दो साल से अधिक समय तक राज्यता की पुनर्स्थापना के लिए क़दम उठाए हैं, लेकिन केंद्र सरकार से स्पष्ट समय‑सीमा नहीं मिली है। इस संघर्ष की जड़ में 2014 के विधानसभा चुनाव और 2020 में जारी किए गए “राज्यता वादा” का नाकाम होना है, जिसे ओमर अब्दुल्ला ने कत्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।

जंतर mantar में घोषित प्रदर्शन

एनसी ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर mantar में एक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आयोजन किया है, जो संसद के मानसून सत्र की पहली दिन coincide करता है। इस कार्रवाई का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाना और सरकार को वादा किए गए राज्यता को लागू करने के लिए बाध्य करना है। अभियोक्ता ने कहा कि प्रदर्शन “लोकतांत्रिक साधनों” के माध्यम से किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था नहीं होगी।

भविष्य की संभावनाएँ और राजनीतिक प्रभाव

यदि केंद्र सरकार इस मांग को टालती रही, तो यह राष्ट्रीय राजनीति में नई उथल‑पुथल पैदा कर सकता है। विपक्षी दलों के लिए यह मुद्दा एकत्रित करने का अवसर बन सकता है, जबकि केंद्र की पार्टी को अपने शासकीय कार्यों को पुनः मूल्यांकन करना पड़ेगा। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी यह मामला ध्यान आकर्षित कर सकता है, क्योंकि ओमर अब्दुल्ला ने “डोनाल्ड ट्रम्प” का उल्लेख कर एक अंतरराष्ट्रीय मंच की ओर संकेत किया है।

जैसे ही जंतर mantar में प्रदर्शन का दिन नजदीक आएगा, राजनीतिक समीक्षकों और विश्लेषकों की नज़रें इस आंदोलन के परिणामों पर टिकी रहेंगी, चाहे वह राज्यता की पुनःस्थापना हो या फिर नई राजनीतिक गठबंधन की शुरुआत।