कोयंबटूर में ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने राज्य सरकार को फसल ऋणों की पूर्ण माफी देने की मांग की। किसानों ने जलवायु परिवर्तन, श्रम की कमी और बढ़ती लागत जैसे कई चुनौतियों को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • AIKS ने कोयंबटूर में फसल ऋण माफी का प्रदर्शन किया
  • किसानों ने जलवायु परिवर्तन, श्रम कमी और महँगी उर्वरक जैसी समस्याओं का उल्लेख किया
  • राज्य सरकार से पूर्ण माफी की मांग, महाराष्ट्र के उदाहरण का हवाला दिया

कोयंबटूर, 13 जुलाई 2026 – ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के सदस्य सोमवार को कोयंबटूर में एक बड़े प्रदर्शन में जुटे, जहाँ उन्होंने तमिलनाडु सरकार से सहयोगी बैंकों के माध्यम से लिये गए फसल ऋणों की पूर्ण माफी की माँग की। यह कदम पार्टी की चुनावी वादे, “किसानों को आर्थिक राहत” को साकार करने की उम्मीद के साथ उठाया गया।

पृष्ठभूमि और वर्तमान परिस्थितियाँ

पिछले दो वर्षों में कोयंबटूर के किसान अत्यधिक मौसमी उतार‑चढ़ाव, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बाढ़‑सूखा, और वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान जैसे कई संकटों का सामना कर रहे हैं। साथ ही, श्रम की कमी, उच्च वेतन, उर्वरक की कीमतों में तीव्र वृद्धि, जल की कमी और ईंधन की महँगी कीमतों ने कृषि उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन कठिनाइयों के कारण कई किसान अपने ऋण चुकाने में असमर्थ हो गए हैं।

AIKS की याचिका और सरकार की प्रतिक्रिया

AIKS ने कोयंबटूर जिला सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक को एक विस्तृत याचिका प्रस्तुत की, जिसमें उपरोक्त सभी समस्याओं को रेखांकित किया गया और सरकार से “अशर्त” फसल ऋण माफी की माँग की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने चुनावी घोषणा के तहत इस माफी का वादा किया था, परंतु अब तक घोषित माफी की सीमा पर्याप्त नहीं है। बैंकों द्वारा ब्याज सहित ऋण पुनर्भुगतान का दबाव किसानों में गहरी असहायता पैदा कर रहा है।

महाराष्ट्र का उदाहरण और अपेक्षित प्रभाव

AIKS ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2023 में लागू की गई पूर्ण फसल ऋण माफी को एक सफल मॉडल के रूप में पेश किया। महाराष्ट्र की इस कदम ने न केवल किसानों को तत्काल राहत दी, बल्कि कृषि क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया। कोयंबटूर के किसानों ने आशा व्यक्त की कि तमिलनाडु भी इसी दिशा में कदम उठाएगा, जिससे कृषि संकट का दीर्घकालिक समाधान संभव हो सके।

भविष्य की दिशा और संभावित परिणाम

यदि राज्य सरकार पूर्ण माफी की घोषणा करती है, तो यह न केवल किसान वर्ग के बीच सरकार के प्रति भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में भी मददगार सिद्ध होगा। दूसरी ओर, यदि माफी में देरी या आंशिकता बनी रहती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ेगा, जिससे आगे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि ऋण माफी को एक व्यापक नीति के हिस्से के रूप में देखना चाहिए, जिसमें जल संरक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच जैसे पहलू भी शामिल हों।