बी.वाई. विजयेंद्र, कर्नाटक के बीजेपी राज्य अध्यक्ष, ने उत्तर कर्नाटक में सूखे से प्रभावित 30 लाख एकड़ खेती के लिए सरकार को न्यूनतम ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा देने का आग्रह किया। उन्होंने कांग्रेस‑प्रधान राज्य सरकार की प्रतिक्रिया में नकारात्मकता जताते हुए अनभवा मंच परियोजना के शेष फंड जारी करने की भी मांग की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- उत्तर कर्नाटक में 30 लाख एकड़ कृषि भूमि बंजर
- विजयेंद्र ने ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की
- अनभवा मंच परियोजना के शेष ₹200 करोड़ जारी करने का आग्रह
कर्नाटक के बी.वाई. विजयेंद्र, बीजेपी राज्य अध्यक्ष, ने मंगलवार को बिदर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए राज्य सरकार को सूखे से प्रभावित किसानों को कम से कम ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष में केवल 12% सामान्य वर्षा प्राप्त हुई, जिससे बिदर, कालबुर्गी और यादगिर जैसे जिलों में 30 लाख एकड़ कृषि भूमि बंजर रह गई। इस वर्ष लाल मसूर, सूरजमुखी और कपास जैसे मुख्य खरीफ़ फसलें बोने में किसान असमर्थ रहे।
बिजली‑संकट और कृषि संकट की पृष्ठभूमि
भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा अब मौसमी समस्या नहीं रह गया, बल्कि सतत आर्थिक जोखिम बन चुका है। उत्तर कर्नाटक में लगातार वर्षा की कमी ने न केवल फसल की उपज घटाई, बल्कि किसानों की ऋणभरण क्षमता को भी क्षीण कर दिया। स्थानीय किसान असोसिएशन के अनुसार, लगभग 70% छोटे और सीमांत किसानों ने पहले ही ऋण पुनर्भुगतान में डिफ़ॉल्ट किया है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ रहा है।
राजनीतिक प्रतिवाद और सरकार की प्रतिक्रिया
विजयेंद्र ने कांग्रेस‑प्रधान शिवाकुमार सरकार की “फोटो‑सेशन” पर टिप्पणी करते हुए कहा, “बासवाकाल्यन की यात्रा सिर्फ़ एक तस्वीर के लिये थी, वास्तविक राहत नहीं मिली।” उन्होंने अनभवा मंच परियोजना के शेष फंड जारी करने की भी माँग की, जिसे पिछले बी.एस. येदीयुरप्पा सरकार ने कुल ₹300 करोड़ दो किस्तों में स्वीकृति दी थी। वर्तमान में शेष ₹200 करोड़ अनहाउस्ड हैं, जबकि परियोजना का कुल अनुमानित खर्च ₹500 करोड़ है।
आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और पार्टी का रणनीतिक योजना
विजयेंद्र ने कहा कि आगामी ज़िला पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए बीजेपी ने जिला स्तर के नेताओं, विधायक और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ परामर्श कर नई रणनीति तैयार की है। पार्टी के कोर कमेटी में बिदर जिले की आंतरिक टकराव को सुलझाने के लिये एक बैठक भी निर्धारित की गई है, जिससे “समायोजन राजनीति” के आरोपों को समाप्त किया जा सके।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि सरकार जल्दी से मुआवजा और जल‑स्रोत प्रबंधन में ठोस कदम नहीं उठाती, तो उत्तर कर्नाटक में ग्रामीण असंतोष और सामाजिक अशांति की संभावना बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सतत जल संरक्षण, ड्रिप इरिगेशन और वैकल्पिक फसल प्रोत्साहन नीतियों के बिना इस क्षेत्र में कृषि पुनरुत्थान संभव नहीं है।