तेलंगाना के मुलुगु जिले में इंदिरम्मा आवास योजना के तहत 5,000 से अधिक घरों का निर्माण तेज़ी से हो रहा है। 1,315 परिवारों ने पहले ही अपने नए घर में कदम रखा, जबकि नई बस्ती को स्थानीय लोग 'सीथक्का कॉलोनी' के नाम से पुकार रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मुलुगु में 5,000 से अधिक घरों का निर्माण जारी
- इंदिरम्मा योजना से 1,315 परिवारों ने नया घर पाया
- स्थानीय निवासी ने नई कॉलोनी को 'सीथक्का कॉलोनी' कहा
तेलंगाना सरकार की इंदिरम्मा आवास योजना ने मुलुगु जिले में सामाजिक‑आर्थिक बदलाव की नई लहर लाई है। 2006 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य राज्य के सबसे बड़े जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को स्थायी घर प्रदान करना है, जिससे शहरी‑ग्रामीण अंतर को कम किया जा सके।
योजना की प्रगति और आँकड़े
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुलुगु में 5,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,315 परिवारों ने पहले ही निर्माण पूरा कर नई छत के नीचे अपना जीवन शुरू किया है। इस गति को बढ़ावा देने में पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री दानासारी अनसूया सीथक्का की सक्रिय भागीदारी प्रमुख रही है, जो इस क्षेत्र की विधानसभा प्रतिनिधि भी हैं।
सीथक्का कॉलोनी का गठन
राघवापटनाम ग्राम पंचायत के अंतर्गत इप्पलागड्डा गांव को पायलट गांव के रूप में चुना गया। यहाँ 90 जनजातीय परिवारों को घर प्रदान किए गए और उन्होंने इस नई बस्ती को अनौपचारिक रूप से "सीथक्का कॉलोनी" नाम दे दिया, जो मंत्री के सम्मान में है। इस नामकरण से स्थानीय लोगों के बीच योजना के प्रति विश्वास और सराहना का इज़हार होता है।
सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास
एटर्नागरम मंडल के कोंडाई गांव में जाम्पन्ना नदियों की बार-बार बाढ़ ने कई परिवारों को अस्थायी शरणस्थलों में रहने पर मजबूर किया था। इंदिरम्मा योजना ने इन जोखिमपूर्ण क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित करने के लिए अतिरिक्त घरों की मंजूरी दी, जिससे भविष्य में बाढ़ से उत्पन्न नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
भविष्य की दिशा
पहले चरण की सफलता के बाद, अधिकारियों ने दूसरे चरण में और 3,430 झोपड़ी-रहने वाले परिवारों को घर प्रदान करने की योजना बनायी है। यह निरंतर विस्तार न केवल आवास सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर पहुँच में भी सहायक होगा।