कुकी-ज़ो समुदाय ने मिज़ोरम के चर्च से नगा चर्च को संवाद स्थापित करने का आग्रह किया और साथ ही केंद्रीय सरकार को मानवीय एवं सुरक्षा संकट को सुलझाने के लिए त्वरित कदम उठाने का अनुरोध किया। इस कदम ने तीन दशक बाद फिर से उठे हिंसा के बीच शांति प्रक्रिया को नया मोड़ दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कुकी-ज़ो प्रतिनिधि मिज़ोरम के चर्च से नगा‑कुकी संवाद में मध्यस्थता चाहते हैं।
- कुकी‑ज़ो समूह ने केंद्रीय सरकार को मानवीय आपातकाल और सुरक्षा संकट को हल करने का लिखित अनुरोध किया।
- तीन दशक बाद फिर से बढ़ते हिंसा ने क्षेत्र में प्रशासनिक पुनर्संरचना की माँग को तेज कर दिया है।
मणिपुर में कुकी‑ज़ो और तांगखुल नगा समुदायों के बीच चल रही झड़पें अब एक नई मोड़ पर पहुँच गई हैं। कुकी‑ज़ो चर्च के प्रतिनिधि एइज़ौल, मिज़ोरम की राजधानी, में नगा‑कुकी संवाद को पुनर्जीवित करने के लिए चर्च के अधिकारियों से मिलेंगे। यह प्रयास तब आया है जब दिल्ली में केंद्र सरकार को संबोधित कई लिखित याचिकाओं के बाद भी क्षेत्र में मानवीय स्थिति बिगड़ती जा रही है।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
1990‑यों के दशक में नगा‑कुकी संघर्ष ने मणिपुर के कई गांवों को तबाह कर दिया था, जिसमें कई सैकड़ों मौतें और बड़ी मानवीय आपदा शामिल थी। उस समय के समझौते के बावजूद, दोनों समुदायों के बीच भरोसे की कमी बनी रही। 2024‑2026 में फिर से बढ़ते हिंसक हमले, जिनमें कुख्यात NSCN(IM) के समूह शामिल हैं, ने दो दशकों से अधिक शांति प्रक्रिया को समाप्त कर दिया।
कुकी‑ज़ो की नई रणनीति
कुकी ज़ोनल काउंसिल (KZC) के अध्यक्ष हेनलियेंटहांग थैंगलेट ने बताया कि उन्होंने पहले यूनाइटेड नगा काउंसिल से संवाद स्थापित करने की कोशिश की, पर वह असफल रहा। अब वे मिज़ोरम के चर्च को इस संघर्ष में मध्यस्थता करने के लिए आग्रह कर रहे हैं, क्योंकि धार्मिक संस्थाएँ दोनों पक्षों के बीच भरोसे का पुल बन सकती हैं। एइज़ौल में आयोजित बैठक में मिज़ोरम के चर्च प्रमुखों से उम्मीद है कि वे नगा‑कुकी दोनों पक्षों को संवाद की ओर आकर्षित करेंगे।
केंद्रीय सरकार को लिखित अनुरोध
कुकी‑ज़ो समूह ने दिल्ली में केंद्र के उत्तर‑पूर्वी इंटरलोक्यूटर अजीत लाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो के महेश दीक्षित से मुलाक़ात की। इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत मेमोरैंडम सौंपा, जिसमें कुकी‑ज़ो क्षेत्रों में मानवीय आपूर्ति बाधित होने, खाद्य, दवाओं और ईंधन की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि, और कई गांवों के जलने की जानकारी दी गई। मेमोरैंडम में तत्काल सुरक्षा कवच, निष्पक्ष जांच और कुकी‑ज़ो के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था की माँग की गई।
भविष्य की चुनौतियाँ
यदि मिज़ोरम के चर्च सफलतापूर्वक नगा‑कुकी संवाद को पुनः आरम्भ कर पाते हैं, तो यह क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार को मानवीय राहत कार्यों को तेज करने, आर्थिक ब्लॉकेड को हटाने और सभी प्रभावित समुदायों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इस समय, दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत और कई गांवों की जलन दोनों पक्षों की पीड़ा को उजागर करती है, जो दीर्घकालिक समाधान की माँग को और अधिक तीव्र बनाती है।