यादगर के शहर परिषद कार्यालय से डॉन बास्को स्कूल तक दो किलोमीटर की कच्ची सड़क को टर सड़क में बदलने का काम विधायक चन्नरेड्डी पाटिल टुन्नुर ने आज शुरू किया। यह परियोजना 1.20 करोड़ रुपये की लागत से KKRDB के अनुदान से पूरी की जाएगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- यादगर में 2 किमी कच्ची सड़क को टर रोड में बदला जाएगा
- परियोजना की लागत 1.20 करोड़ रुपये, KKRDB के अनुदान से
- विधायक ने गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर दिया
कर्नाटक के यादगर जिले में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परिवर्तन की शुरुआत हुई है। विधानसभा सदस्य चन्नरेड्डी पाटिल टुन्नुर ने सोमवार को दो किलोमीटर की कच्ची सड़क के लिए नींव पत्थर रखी, जो शहर परिषद कार्यालय के पीछे से डॉन बास्को स्कूल तक फैली हुई है। यह सड़क वर्तमान में बवंडर और गंदे जल से ग्रसित है, जिससे स्थानीय यात्रियों को हर दिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
परियोजना का आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹1.20 करोड़ है, जो कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड (KKRDB) के अनुदान के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। इस विकास से न केवल दैनिक यातायात सुगम होगा, बल्कि शिक्षा संस्थानों, जिला प्रशासनिक भवन और जिला न्यायालय तक पहुंचना भी आसान होगा। स्थानीय नागरिकों ने लंबे समय से इस मार्ग को बेहतर बनाने की मांग की थी, क्योंकि वर्तमान में उन्हें डिग्री कॉलेज के माध्यम से लंबा राउंड‑ऐवेज़ करना पड़ता है।
विधायक का संदेश और आगे की योजना
विधायक पाटिल ने ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि काम को उच्चतम गुणवत्ता के साथ, निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा, “यह एक शॉर्टकट और अधिक सुविधाजनक मार्ग है, जिससे मुख्य सड़क तक पहुंचना आसान होगा।” साथ ही, उन्होंने बताया कि अधिकारी अतिरिक्त ₹60 लाख की राशि की मांग कर रहे हैं, जिसे जल्द ही प्रदान किया जाएगा, ताकि काम में किसी प्रकार की देरी न हो।
क्षेत्रीय विकास के व्यापक प्रभाव
यादगर, जो कर्नाटक के दक्षिणी भाग में स्थित एक कृषि‑मुख्य जिला है, पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक और शहरीकरण के पहलुओं में धीमी प्रगति देख रहा है। इस तरह की बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि ग्रामीण‑शहरी अंतर को भी घटाती हैं। टर रोड बनने से लॉजिस्टिक लागत घटेगी, व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी, और विद्यार्थियों को स्कूल तक पहुँचने में समय की बचत होगी।
भविष्य की दिशा
यदि इस परियोजना को समय पर और सही गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता है, तो यह अन्य पड़ोसी जिलों के लिए एक मॉडल बन सकता है। KKRDB के अन्य अनुदान‑आधारित योजनाओं के साथ समन्वय करके, कर्नाटक सरकार ग्रामीण बुनियादी ढाँचा को मजबूत करने में नई गति प्रदान कर सकती है। इस पहल से यादगर के लोगों में आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं में भरोसा बढ़ेगा, जिससे आगे भी समुदाय‑आधारित विकास कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा।