राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर वरिष्ठ कार्यकर्ता सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्षता को लेकर कानूनी नोटिस जारी किया। यह कदम पार्टी के भीतर आंतरिक विभाजन और अजीत पवार की मृत्यु के बाद नेतृत्व में अशांति को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु
- Sunetra Pawar की अध्यक्षता पर कानूनी चुनौती
- राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने नोटिस जारी किया
- पार्टी में आंतरिक विभाजन और सुधार की मांग
मुंबई – राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर एक गंभीर आंतरिक टकराव ने सार्वजनिक रूप से अपना रूप दिखा दिया है। राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने 9 जुलाई को एक कानूनी नोटिस जारी किया, जिसमें सुनेत्रा पवार, प्राफ़ुल पटेल और राष्ट्रीय महासचिव ब्रिजमोहन श्रीवास्तव को पार्टी के संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। नोटिस का मुख्य उद्देश्य सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्षता को “अवैध, अस्तित्वहीन और शून्य” घोषित करवाना है।
पार्टी के भीतर पृष्ठभूमि
NCP का गठन 1999 में अजीत पवार और शरद पवार द्वारा किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर उत्पन्न असंतोष को प्रतिबिंबित करना था। अजीत पवार, जो कई दशकों से राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण नेता रहे, की 2026 में आकस्मिक मृत्यु ने पार्टी के नेतृत्व में एक बड़ा शून्य छोड़ दिया। उनकी मृत्यु के बाद, प्राफ़ुल पटेल ने अस्थायी राष्ट्रीय अध्यक्षता संभाली, लेकिन यह व्यवस्था केवल अस्थायी मानी गई थी।
कानूनी नोटिस के मुख्य आरोप
सिंह के अनुसार, 26 फरवरी को मुंबई के NSCI डोम में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष चुना गया, जबकि पार्टी के संविधान में निर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। विशेष रूप से, नोटिस में कहा गया है कि अध्यक्षता चुनाव की शुरुआत करने का अधिकार केवल कार्यकारी अध्यक्ष के पास था, न कि महासचिव के पास। साथ ही, स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की नियुक्ति, चुनाव शेड्यूल का प्रकाशन, नामांकन का आमंत्रण और मतदान प्रक्रिया जैसी अनिवार्य प्रक्रियाएँ पूरी नहीं की गईं।
आंतरिक असंतोष और संभावित परिणाम
यह मामला केवल एक कानूनी चुनौती नहीं, बल्कि NCP के भीतर गहरी factionalism का संकेत है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्थ पवार, जो राजसभा सांसद हैं, के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है। प्राफ़ुल पटेल ने सार्वजनिक रूप से “सुधारात्मक उपायों” की आवश्यकता को रेखांकित किया, जिससे स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। यदि नोटिस में मांगे गए 15‑दिन के भीतर सुधार नहीं किए गए, तो मामला न्यायालय और चुनाव आयोग दोनों में पहुँचा जा सकता है, जिससे पार्टी की कार्यक्षमता और सार्वजनिक छवि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
भविष्य की दिशा
वर्तमान परिदृश्य में NCP को दो मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा: पहला, संविधानिक प्रक्रिया के अनुसार एक नई राष्ट्रीय अध्यक्षता का चुनाव कराना, और दूसरा, अजीत पवार की मृत्यु के बाद उत्पन्न नेतृत्व के अंतर को पाटना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी इस क्षणिक संकट को हल नहीं करती, तो यह दीर्घकालिक विभाजन और संभावित नई धुरी के गठन की राह पर चल सकती है।