थूटुकीडी निगम के अनुबंधित सफाई कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन लागू करने और बकाया वेतन को सीधे खाते में जमा करने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU) ने किया, जबकि निजी ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सफाई कर्मचारियों ने 2026-27 के न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग की।
  • AICCTU ने निजी ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
  • प्रदर्शन से शहर के कुछ हिस्सों में सफाई सेवाओं में व्यवधान आया।

थूटुकीडी निगम में अनुबंधित सफाई कर्मचारियों ने 13 जुलाई, 2026 को एक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया, जिससे नगर निगम की मुख्य इमारत के सामने लगभग दो सौ कार्यकर्ता एकत्र हुए। यह प्रदर्शन ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU) के राज्य उपाध्यक्ष त. साहयम की अगुवाई में हुआ, जो कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा और निजी ठेकेदार द्वारा कथित अनियमितताओं के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा था।

प्रदर्शन की मुख्य मांगें

कर्मचारियों ने थूटुकीडी जिला कलेक्टर द्वारा 2026-27 के लिए प्रकाशित न्यूनतम वेतन का पूर्ण कार्यान्वयन माँगा। इसके अलावा, उन्होंने बकाया वेतन को सीधे अपने बैंक खातों में जमा करने की मांग की, जिससे भुगतान में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके। ये मांगें स्थानीय श्रम कानूनों और राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप हैं, लेकिन निगम द्वारा अनुबंधित निजी कंपनी ने इनका पालन नहीं किया, ऐसा प्रदर्शनकर्ता दावा करते हैं।

AICCTU का आरोप और अनुबंध रद्द करने का आग्रह

AICCTU ने निजी ठेकेदार पर निरंतर भ्रष्टाचार, अनुचित भुगतान और अनुबंध उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए। संगठन ने निगम प्रशासन से तत्काल अनुबंध समाप्त करने और एक पारदर्शी, सार्वजनिक रूप से परीक्षण योग्य ठेकेदार चुनने की मांग की। इस प्रकार की मांगें भारतीय श्रमिक आंदोलन के इतिहास में अक्सर देखी गई हैं, जहाँ स्थानीय स्तर पर निजी कंपनियों की अनियमितताओं को उजागर करके सार्वजनिक हित की रक्षा की जाती है।

निगमन की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

प्रदर्शन के बाद निगम के अधिकारियों ने AICCTU के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। परिणामस्वरूप, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए विरोध जारी रखा। सुरक्षा बलों को निगम परिसर में बढ़ा दिया गया, जिससे भविष्य में संभावित धावा या हिंसा को रोकने की तैयारी स्पष्ट हुई।

भविष्य के प्रभाव और संभावित विकास

यदि इस आंदोलन को सफलता मिलती है, तो यह दक्षिण भारत में सार्वजनिक सेवा अनुबंधों के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। साथ ही, यह श्रमिक वर्ग के आर्थिक अधिकारों की पुनर्स्थापना और निजी ठेकेदारों के प्रति कड़ी निगरानी के लिए एक चेतावनी स्वरूप हो सकता है। अन्य राज्यों में समान मांगें उठाने वाले समूह इस केस को उदाहरण के रूप में ले सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिक नीति में सुधार की दिशा में दबाव बढ़ेगा।