तेलंगाना एंटी‑करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने हाइड्राबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एचएमडीए) के मुख्य अभियंता बी रविंदर के खिलाफ अनुचित संपत्ति मामला दर्ज किया। खोज में 9.24 करोड़ रुपये मूल्य की जायदाद, नकद, बैंक जमा और बड़े पैमाने पर सोना‑चाँदी की जडियां बरामद हुईं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एचएमडीए प्रमुख अभियंता बी रविंदर पर 9.24 करोड़ रुपये की अनुचित संपत्ति का आरोप।
- खोज में 1.44 किग्रा सोना, 12.5 किग्रा चाँदी और कई अचल संपत्तियां बरामद हुईं।
- जांच जारी है, अतिरिक्त संपत्तियों की पुष्टि की प्रक्रिया में है।
तेलंगाना एंटी‑करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को हाइड्राबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एचएमडीए) के मुख्य अभियंता बी रविंदर के खिलाफ अनुचित संपत्ति के आरोप में एक मामला दर्ज किया। यह कदम एसीबी की भ्रष्टाचार विरोधी पहल का हिस्सा है, जो राज्य‑स्तरीय सार्वजनिक अधिकारियों की संपत्तियों पर कड़ी नजर रखता है।
खोज में बरामद हुई संपत्तियों का विवरण
रविंदर के निजी आवास, कार्यालय और उनके रिश्तेदारों एवं सहयोगियों के नौ अन्य ठिकानों की तलाशी में कुल मिलाकर 9.24 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति मिली। इनमें पाँच खुले प्लॉट, चार फ्लैट, चार एकड़ कृषि भूमि, एक अर्ध‑सज्जित विला और ग्राउंड‑प्लस‑चार (G+4) इमारत शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन संपत्तियों का बाजार मूल्य सरकारी आकलन से कहीं अधिक है।
भौतिक संपत्ति की विशाल मात्रा
तलाश के दौरान एसीबी ने 3.82 लाख रुपये नकद, लगभग 45 लाख रुपये की बैंक जमा, 1,440 ग्राम (लगभग 1.44 किग्रा) सोने के आभूषण और 12.5 किग्रा चाँदी के आभूषण, साथ ही घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और चार वाहन भी जब्त किए। इन वस्तुओं का कुल अनुमानित मूल्य 9.24 करोड़ रुपये बताया गया है।
क़ानूनी पृष्ठभूमि और संभावित परिणाम
रविंदर के खिलाफ अनुचित संपत्ति के आरोप भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत लाए गए हैं। यदि अदालत में सिद्ध हो जाता है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर संपत्ति अर्जित की है, तो उन्हें भारी जुर्माना और 7 वर्ष तक की कैद जैसी सजा हो सकती है। यह मामला एसीबी की सख्त कार्यवाही को दर्शाता है, जिससे भविष्य में अन्य अधिकारी भी सतर्क रहेंगे।
आगे की जांच और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
अधिकारी बताते हैं कि अभी भी अतिरिक्त संपत्तियों की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय जनता में सरकारी भ्रष्टाचार के प्रति बढ़ती निराशा को उजागर किया है, जबकि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को भी बढ़ावा दिया है।
इस व्यापक मामले में एसीबी की तेज़ कार्रवाई एक उदाहरण सेट करती है, जिससे सार्वजनिक संस्थानों में भरोसा पुनः स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ता है।