कर्नाटक सरकार बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नरेट को दो या तीन छोटे कमिश्नरेटों में बाँटने पर विचार कर रही है। यह कदम बढ़ते शहरी विस्तार, ग्रामीण पुलिस इकाइयों के साथ असंगतता और प्रभावी नियंत्रण की जरूरत को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नरेट को दो‑तीन नई इकाइयों में विभाजित करने की संभावना पर सरकार अध्ययन कर रही है।
  • वर्तमान में 186 थाने, 115 कानून‑व्यवस्था और 53 ट्रैफ़िक थाने शामिल हैं, जिससे प्रबंधन जटिल हो रहा है।
  • अन्य मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई) में कई कमिश्नरेट हैं, जबकि बेंगलुरु में अभी भी एक ही बड़ी इकाई है।

कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नरेट (BCP) को दो या तीन अलग‑अलग शहर पुलिस कमिश्नरेटों में बाँटने की गंभीरता से समीक्षा शुरू कर दी है। यह प्रस्ताव गृह मंत्री प्रियंक खरगे की पुष्टि के बाद सार्वजनिक हुआ, जिसमें बताया गया कि पहले भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब इसे ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के गठन के साथ पुनः उठाया गया है।

पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

वर्तमान में BCP के अंतर्गत 186 थाने कार्यरत हैं, जिनमें 115 कानून‑व्यवस्था, 53 ट्रैफ़िक, 9 साइबर‑क्राइम, 8 महिला थाने और एक केंद्रीय अपराध शाखा शामिल हैं। शहर के क्षैतिज विस्तार के साथ 2007 में बीबीएमपी की सीमा 225 वर्ग किमी से बढ़ाकर 709 वर्ग किमी की ब्रहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) कर दी गई थी, जिससे कई नई शहरी‑प्रकृति वाले थाने ग्रामीण पुलिस इकाइयों में ही रह गए।

अन्य मेट्रो शहरों से तुलना

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और चेन्नई जैसे प्रमुख मेट्रो में कई कमिश्नरेट स्थापित हैं, जहाँ मुख्य शहर के साथ उपनगरों को अलग‑अलग कमिश्नरेटों में बाँटा गया है। बेंगलुरु के विपरीत, जहाँ अभी भी एक ही बड़ी कमिश्नरेट ग्रामीण जिले की पुलिस इकाइयों से घिरी हुई है, यह असंगतता प्रशासनिक बोझ बढ़ा रही है।

विभाजन के पक्ष‑और‑विपक्ष के तर्क

प्रमुख पुलिस अधिकारी का कहना है कि 1.5 करोड़ से अधिक जनसंख्या और 709 वर्ग किमी के विस्तृत क्षेत्र को एक ही कमिश्नर संभालना “अत्यधिक बोझिल” है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोर शहर को बेंगलुरु सिटी पुलिस के रूप में रखा जाए और उपनगरों को दो अतिरिक्त कमिश्नरेटों में पुनर्गठित किया जाए। दूसरी ओर, कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एकीकृत कमांड की महत्ता पर ज़ोर देते हुए तर्क देते हैं कि एक स्पष्ट श्रृंखला के साथ ही प्रभावी policing संभव है। वे सुझाव देते हैं कि पाँच निगमों के लिए पाँच जॉइंट कमिश्नर और अतिरिक्त कमिश्नर (कानून‑व्यवस्था, ट्रैफ़िक, साइबर‑क्राइम) की संरचना अपनाई जाए, जिससे नियंत्रण में सुधार हो सके।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि विभाजन को मंज़ूरी मिलती है, तो नई कमिश्नरेटें शहरी‑उपनगरीय क्षेत्रों को बेहतर संसाधन और स्थानीय प्रशासन प्रदान कर सकेंगी। यह कदम बेंगलुरु के निरंतर तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, ट्रैफ़िक जाम, साइबर‑क्राइम और महिला सुरक्षा जैसी चुनौतियों को संबोधित करने में सहायक हो सकता है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जहाँ बड़े शहरों में समान प्रशासनिक असंतुलन मौजूद है।

अंत में, सरकार ने कहा है कि सभी संभावित लाभ‑हानियों का व्यापक मूल्यांकन करने के बाद ही प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने पेश किया जाएगा। इस प्रक्रिया में विभिन्न हितधारकों, विशेषकर पुलिस, शहरी नियोजन और नागरिक समाज की राय को शामिल किया जाएगा।