पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौडा ने बिदाड़ी में AI‑संचालित टाउनशिप परियोजना को कांग्रेस के लिए धन संग्रह का साधन बतलाया। उन्होंने ग्रामीणों की आजीविका और दूध उत्पादन पर संभावित प्रभाव को उजागर कर राज्य सरकार से इस योजना को रोकने की अपील की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • देवगौडा ने बिदाड़ी परियोजना को कांग्रेस के फंड‑राइज़िंग उपाय कहा
  • परियोजना से हजारों किसानों की आजीविका और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है
  • कर्नाटक सरकार को सर्वेक्षण रोक कर वैकल्पिक भूमि विकल्प तलाशने का आह्वान

बेंगलुरु में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जे.डी.(एस) के वरिष्ठ नेता एच.डी. देवगौडा ने कांग्रेस सरकार पर बिदाड़ी में प्रस्तावित AI‑संचालित इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को चुनाव‑पूर्व धन संग्रह के साधन के रूप में उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण से हजारों छोटे किसान‑किसानियों की आजीविका बर्बाद हो जाएगी।

परियोजना का पृष्ठभूमि

बिदाड़ी परियोजना, जिसे कर्नाटक सरकार ने 2024 में शुरू किया था, का उद्देश्य एक हाई‑टेक टाउनशिप बनाकर शहरी‑ग्रामीण अंतर को पाटना था। योजना में स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक पार्क और आवासीय इकाइयों को AI‑आधारित प्रबंधन प्रणाली के साथ जोड़ा गया है। हालांकि, इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण कई छोटे किसानों से किया गया है, जिनके पास केवल छोटे‑छोटे वारिसीय खेत हैं।

देवगौडा का विरोध और किसान‑दूध उत्पादन

देवगौडा ने बताया कि बिदाड़ी के आसपास के गाँवों में लगभग 40,000 छोटे‑छोटे खेत हैं, जहाँ किसान प्रतिदिन 60,000 लीटर दूध बेंगलुरु को आपूर्ति करते हैं। उन्होंने कहा, “ये किसान केवल अपने पूर्वजों की जमीन पर निर्भर हैं, उनके पास कोई वैकल्पिक आय का साधन नहीं है।” इस पर वे सरकार से अपील करते हैं कि सर्वेक्षण को रोककर बेंगलुरु में मौजूद 40,000 खाली साइटों और खाली अपार्टमेंट्स का उपयोग करके नई योजना बनायी जाए।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

जेडी(एस) ने बिदाड़ी परियोजना को अपने पक्ष में लेकर कई बार विरोध किया है, जबकि मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने इस मुद्दे को कांग्रेस‑जेडी(एस) गठबंधन की राजनीति में बदल दिया है। शिवाकुमार ने याद दिलाया कि इस परियोजना की घोषणा तब हुई थी जब जेडी(एस) के नेता एच.डी. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री थे, और उन्होंने इस भूमि को “डीनोटिफ़ाई” करने की बात कही थी। इस बीच, कांग्रेस ने कहा कि परियोजना में स्थानीय विकास और रोजगार सृजन की बड़ी संभावनाएँ हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि बिदाड़ी परियोजना को आगे बढ़ाया गया, तो यह कर्नाटक के ग्रामीण‑शहरी संतुलन, कृषि‑आधारित आय और राज्य की राजस्व संरचना पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित पुनर्वास और वैकल्पिक आजीविका के समर्थन के, ऐसी बड़े पैमाने की परियोजनाएँ सामाजिक असंतोष को बढ़ा सकती हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तीव्र हो सकती है।