दिल्ली के कर्करड़ूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन के मुकदमे में निर्णय से पहले अपराध स्थल का दौरा किया, जिससे गवाहों के बयान की विश्वसनीयता पर नया प्रकाश पड़ा। यह कदम 2002 के गुजरात दंगों के बाद पहली बार ऐसा देखा गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- न्यायिक पैनल ने 2020 की दिल्ली दंगों के स्थल का निरीक्षण किया
- गवाहों के बयान की सत्यता जांचने के लिए स्थल यात्रा दुर्लभ है
- निर्णय में गवाहों की स्थिति और दृश्यता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई
15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के नेतृत्व में एक न्यायिक पैनल ने चाँद बाग, उत्तर‑पूर्व दिल्ली के दंगों के प्रमुख स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। यह निरीक्षण तब हुआ जब ताहिर हुसैन के खिलाफ चल रहे मुकदमे में अभी तक फैसला नहीं दिया गया था, जिससे भारतीय न्याय प्रणाली में एक अनोखा कदम दर्ज किया गया।
पृष्ठभूमि और मामला
2020 के उत्तर‑पूर्व दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई, जिसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल थी। उनका शव खजूरी खास नाली में मिला था, और मामला कई महीनों तक पुलिस और अपराध शाखा द्वारा जाँच में रहा। 11 मई को चाँद बाग की गलियों में भारी पुलिस तैनाती के बाद, न्यायिक पैनल ने स्थल पर जाकर गवाहों के बयान, स्थल‑भौगोलिक विशेषताओं और मलबे की स्थितियों की तुलना की।
जाँच का विशिष्ट पहलू
पुलिस के अनुसार, निर्णय सुनाए जाने से पहले ऐसे स्थल‑भ्रमण बहुत ही दुर्लभ होते हैं। एक अधिकारी ने कहा, “हमने 2002 के गुजरात दंगों के समय ऐसा कुछ देखा था, लेकिन इस तरह की प्रक्रिया अक्सर केवल साक्ष्य की पुष्टि के लिए की जाती है।” पैनल ने गली‑6, जहाँ अंकित शर्मा का घर था, और चाँद बाग पुलिया के पास के नाली को भी देखा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गवाहों के कथन स्थल से कितनी दूरी पर थे।
न्यायाधीश की टिप्पणी
न्यायाधीश सिंह ने अपने आदेश में कहा कि एक गवाह ने कभी नहीं कहा था कि वह घटना को गली‑6 के मुख्य द्वार के भीतर से देख रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गवाह ने केवल “द्वार के पास” देखा, न कि “द्वार के अंदर”। इसके अलावा, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चाँद बाग पुलिया मुख्य करावल नगर रोड के मिलन बिंदु से स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, और गवाह ने ताहिर हुसैन को पुलिया के पास नहीं, बल्कि शर्मा के घर के पास देखा।
संभावित प्रभाव
यह निरीक्षण न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और साक्ष्य‑आधारित निर्णय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि गवाहों की स्थिति और दृश्यता को स्पष्ट किया गया तो यह भविष्य में समान मामलों में साक्ष्य‑परीक्षण के मानक को ऊँचा कर सकता है। साथ ही, यह दर्शाता है कि न्यायालयों में जटिल सामाजिक दंगों के मामलों में भी विस्तृत स्थल‑जाँच को प्राथमिकता दी जा रही है।