लद्दाख की मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल विकास परिषद स्थापित करने की घोषणा की। यह कदम स्थानीय मांगों को पूरा करते हुए क्षेत्र में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सुदृढ़ करेगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- लद्दाख में सात सभी जिलों में स्वायत्त हिल विकास परिषद स्थापित की जाएगी।
- नई परिषदें विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार रखेंगी।
- यह कदम लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय शासन को सुदृढ़ करेगा।
लद्दाख प्रशासन ने सोमवार को घोषणा की कि अब सातों जिलों – लेह, कारगिल, ड्रास, शाम, नुब्रा, चांगथांग और ज़ान्सकर – में स्वायत्त हिल विकास परिषद (LAHDC) स्थापित की जाएगी। मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बताया कि यह निर्णय प्रत्येक नए जिले की स्थानीय जनता की मांग को पूरा करता है और "लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जड़ स्तर की शासन व्यवस्था" की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा
अब तक लद्दाख में केवल दो जिलों – लेह और कारगिल – में ही LAHDC कार्यरत थी। 2024 में केंद्र सरकार ने पाँच नए जिलों की घोषणा की, जिससे कुल सात जिले बन गए। लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषद अधिनियम की धारा 3(1) के तहत प्रत्येक जिले में परिषद की स्थापना का प्रावधान है, और यह अधिनियम अब सभी नए जिलों पर लागू किया जाएगा।
केंद्रीय टीम का दौरा और कस्टम मॉडल
हाल ही में केंद्र सरकार की एक टीम ने लद्दाख का दौरा किया, जिसमें यह सहमति बनी कि अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष संघीय मॉडल तैयार किया जाएगा। इस मॉडल में अन्य राज्यों की सफल प्रणालियों को लद्दाख की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया जाएगा, जिससे परिषदों को व्यापक विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे।
संभावित प्रभाव और महत्व
नई परिषदों के पास भूमि उपयोग, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निर्णय लेने की शक्ति होगी। यह न केवल स्थानीय समस्याओं का तेज़ समाधान संभव बनाएगा, बल्कि प्रदेश में आर्थिक विकास को भी गति देगा। कुंद्रा ने कहा, "2026 लद्दाख के इतिहास में एक जलमार्गीय वर्ष होगा," क्योंकि यह परिवर्तन प्रदेश की शासन संरचना को मूल रूप से पुनः आकार देगा।
आगे का रास्ता
जबकि यह पहल सकारात्मक संकेत देती है, सफल कार्यान्वयन के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी। लद्दाख के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक‑आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए, नई परिषदों को इन विविधताओं को समाहित करने की क्षमता दिखानी पड़ेगी।