बिदाड़ी में जॉइंट मापन समिति के सर्वेक्षण के दौरान महिलाओं ने अधिकारियों पर झाड़ू से हमला किया, जिससे दो FIR दर्ज हुए। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई कठोर धारा लागू की और विरोध जारी रखने वाले किसानों को चेतावनी दी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- दो FIRs भारतीय न्याय संहिता की कठोर धारा के तहत दर्ज की गईं।
- किसानों ने सर्वे अधिकारियों पर झाड़ू और पत्थर फेंक कर हमला किया।
- राजनीतिक नेता सरकार से बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना का विस्तृत श्वेतपत्र मांग रहे हैं।
बिदाड़ी, कर्नाटक – मंडालहली गाँव में महिलाओं के समूह ने जॉइंट मापन समिति (JMC) के सर्वेक्षण टीम को रोकते हुए झाड़ू, पत्थर और अन्य वस्तुओं से हमला किया। यह घटना बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना के तहत बड़े बेंगलुरु टाउनशिप के निर्माण के लिए भूमि सर्वेक्षण के दौरान हुई। कई अधिकारी घायल हुए, जिससे बिदाड़ी पुलिस ने दो प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कीं।
घटना की विस्तृत जानकारी
पहला FIR ड्राइवर की शिकायत पर दर्ज किया गया, जिसने सर्वे टीम को लाया था। दूसरा FIR रमनागरा ग्रामीण पुलिस स्टेशन के निरीक्षक मुराली की शिकायत पर दायर किया गया। दोनों FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189, 126(2), 352, 351, 109(1), 115(2), 132, 133 और 74 का हवाला दिया गया, जिसमें unlawful assembly, attempt to murder, और महिला के विरुद्ध हिंसा जैसी गंभीर आरोप शामिल हैं।
किसानों की मांगें और सरकारी प्रतिक्रिया
फ़सलियों का कहना है कि उन्हें आधिकारिक सर्वेक्षण आदेश नहीं मिला था, जबकि ग्रेटर बेंगलुरु डिवेलपमेंट अथॉरिटी (GBDA) ने कहा कि टीम केवल उन भूमि का सर्वेक्षण कर रही थी जिनके मालिकों ने अनुमति दी थी। बेंगलुरु दक्षिण के पुलिस अधीक्षक, आर. श्रीनिवास गोव्डा ने कहा कि पुलिस किसी भी तरह के सर्वेक्षण में बाधा डालने वाले कार्यों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिक्रिया
विरोधी दल के मुख्य व्हिप, एन. रवी कुमार ने बिदाड़ी किसानों के खिलाफ इस घटना को “अत्याचार” कहा और राज्य सरकार से बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना के सभी पहलुओं पर विस्तृत श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। किसान समूह ने बायरा माँगला गाँव में अगली दिन प्रोटेस्ट जारी रखा, यह कहते हुए कि 480 दिन से वे शांति से विरोध कर रहे हैं और केवल सर्वेक्षण के आरोपित जबरन लागू करने पर ही हिंसा हुई।
भविष्य की संभावनाएँ
किसानों के बीच गहरी असंतुष्टि और सरकार की कठोर प्रतिक्रिया के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। यदि श्वेतपत्र नहीं जारी हुआ तो इस क्षेत्र में और भी बड़े विरोध और संभावित कानूनी लड़ाइयाँ हो सकती हैं, जो बेंगलुरु की शहरी विस्तार योजनाओं को प्रभावित कर सकती हैं।