पटना हाई कोर्ट में खान सर ने FIR को खारिज करने की याचिका दायर की, पर बिहार पुलिस ने इसे अस्वीकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि वैध हथियार लाइसेंस का अस्तित्व सार्वजनिक स्थान पर गोली चलाने का अधिकार नहीं देता।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बिहार पुलिस ने FIR को खारिज करने की याचिका को अस्वीकार किया।
- हथियार लाइसेंस का होना सार्वजनिक जगह में गोली चलाने की अनुमति नहीं देता।
- केस अभी भी अनुसंधान चरण में है, कई साक्ष्य और वीडियो की जांच चल रही है।
पटना हाई कोर्ट ने 9 जून को खफ़ीयर खान, जिन्हें आमतौर पर खान सर के नाम से जाना जाता है, की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर FIR को रद्द करने की मांग की थी। इस याचिका के खिलाफ बिहार पुलिस ने स्पष्ट तर्क दिया कि केवल हथियार लाइसेंस होने से सार्वजनिक स्थान पर गोली चलाने का अनिवार्य अधिकार नहीं मिलता।
पृष्ठभूमि और कानूनी ढाँचा
खान सर, जो पटना के एक लोकप्रिय कोचिंग संस्थान Khan Global Studies (KGS) के संस्थापक हैं, को 2 जून को हुए हिंसा के बाद FIR दर्ज हुई। पुलिस ने बताया कि विरोधी कोचिंग संस्थान के समर्थकों ने परिसर को तोड़‑फोड़ किया और एक सुरक्षा गार्ड पर हमला किया। इस घटना के बाद, दो सुरक्षा गार्डों ने वीडियो में दिखाए गए क्रम में गोलीबारी की, जिससे अतिरिक्त FIR दर्ज की गई।
पुलिस का प्रतिवाद
बिहार पुलिस ने अपने उत्तर में कहा कि FIR केवल “अटकलबाज़ी” पर नहीं, बल्कि “विश्वसनीय जानकारी” और “साक्ष्य‑आधारित वीडियो” पर आधारित है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हथियार लाइसेंस का होना स्वतः ही सार्वजनिक स्थान पर गोली चलाने को वैध नहीं बनाता, और यह जांच का हिस्सा है कि क्या लाइसेंस की शर्तें उल्लंघित हुई हैं।
न्यायालय की प्रक्रिया
हाई कोर्ट ने 10 जून को राज्य को चार हफ्ते में प्रतिवाद दाखिल करने का आदेश दिया और याचिकाकर्ता को उत्तर‑प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति दी। कोर्ट ने मामलों को “स्थिति बनाए रखें” के आदेश के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया, जिससे वर्तमान में जांच जारी है।
भविष्य की संभावनाएँ
राज्य ने बताया कि इस मामले में सेक्शन 109 (हत्याचार की कोशिश) के तहत तथा 1959 के Arms Act के सेक्शन 25(9), 27 और 35 के तहत अभियोजन जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के पूर्वनिर्णयों का हवाला देते हुए, पुलिस ने कहा कि अभी तक FIR को खारिज करने का कोई आधार नहीं है।