भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर वोट बैंक बनाने के लिए बांग्लादेशी नागरिकों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र (PRC) जारी करने का गंभीर आरोप लगाया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस मामले में राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों को PRC जारी करने का आरोप लगाया।
- विपक्ष का दावा है कि यह आगामी चुनावों के लिए 'वोट बैंक' बनाने की साजिश है।
- आर. अशोक ने कहा कि नागरिकता का मुद्दा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
- भाजपा ने एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ मामले में CBI जांच की मांग भी की है।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार आगामी ग्राम पंचायत, जिला पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए जानबूझकर बांग्लादेशी नागरिकों और अन्य विदेशी मूल के लोगों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र (PRC) जारी कर रही है।
संघीय ढांचे पर हमला और कानूनी विवाद
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार को राज्यपाल थावरचंद गेहलोत को एक ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की। अशोक ने तर्क दिया कि नागरिकता, विदेशियों की पहचान और प्रवासन (migration) से संबंधित मामले पूरी तरह से 'संघ सूची' (Union List) के अंतर्गत आते हैं, जो विशेष रूप से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार द्वारा एकतरफा रूप से PRC जारी करने का अधिकार अपनाना न केवल अवैध है, बल्कि यह हमारे संघीय ढांचे के लिए भी एक खतरनाक कदम है।"
वोट बैंक की राजनीति और जांच की मांग
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार इस प्रक्रिया के माध्यम से एक नया 'वोट बैंक' तैयार करने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि वे सरकार को इस विवादास्पद प्रस्ताव को वापस लेने का निर्देश दें। साथ ही, उन्होंने इस बात की भी जांच की मांग की है कि क्या इस अधिसूचना को जारी करने से पहले केंद्र सरकार से परामर्श लिया गया था और भारतीय नागरिकता के सत्यापन के लिए किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
भगदड़ मामले में CBI जांच की मांग
राजनीतिक विवादों के बीच, आर. अशोक ने एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हुई दुखद भगदड़, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई थी, का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच को समाप्त करने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। अशोक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि भाजपा की सरकार सत्ता में आती है, तो इस मामले की गहन जांच CBI से कराई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों के परिवार के सदस्यों को कानून से ऊपर रखा जा रहा है, जो युवाओं के साथ विश्वासघात है।