प्रसिद्ध कवि के. सच्चिदानंदन ने PM SHRI योजना को संविधान का उल्लंघन बताते हुए इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने का एक माध्यम करार दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कवि के. सच्चिदानंदन ने PM SHRI योजना को 'संविधान को कमजोर करने वाला' बताया।
  • चेतावनी दी गई है कि यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेगी।
  • CPI द्वारा त्रिशूर में इस योजना के विरोध में एक धर्मनिरपेक्ष शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • शिक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते खतरों का मुद्दा उठाया गया।

प्रसिद्ध कवि और पूर्व शिक्षक के. सच्चिदानंदन ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी PM SHRI योजना पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे 'संविधान को दरकिनार करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण' बताया है। त्रिशूर में आयोजित एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस योजना को राज्य में लागू किया जाता है, तो यह अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के पूर्ण रोलआउट का रास्ता साफ कर देगी।

शिक्षा के भविष्य पर संकट

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) द्वारा आयोजित इस 'धर्मनिरपेक्ष शिक्षा सम्मेलन' में सच्चिदानंदन ने अपने शिक्षण अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि PM SHRI योजना की कमियां स्पष्ट हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह योजना केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि शिक्षा के मूल ढांचे को बदलने का एक सुनियोजित प्रयास है। उनके अनुसार, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में शिक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों ही गंभीर संकट में हैं।

राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ

सच्चिदानंदन ने बढ़ते 'फासीवाद' का उल्लेख करते हुए कहा कि जब लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा हो, तब राजनीति और सक्रियता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने केरल के नागरिकों और नीति निर्माताओं से आह्वान किया कि वे इस बात पर गंभीरता से विचार करें कि क्या वे केंद्र प्रायोजित इस योजना के माध्यम से NEP के एजेंडे को स्वीकार करना चाहते हैं।

संगठनात्मक विरोध और एकजुटता

इस सभा की अध्यक्षता CPI जिला सचिव के.जी. शिवनंदन ने की। कार्यक्रम में ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) के राज्य अध्यक्ष के. शजाहान सहित विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को राजनीति के उपकरण के रूप में उपयोग करने के खिलाफ अधिक से अधिक धर्मनिरपेक्ष सम्मेलन आयोजित किए जाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।