पंजाब कांग्रेस में आंतरिक कलह चरम पर है, जहाँ कई वरिष्ठ नेताओं ने चरणजीत सिंह चन्नी के प्रति एकजुटता दिखाते हुए राजा वारींग के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पंजाब कांग्रेस में राजा वारींग के नेतृत्व को लेकर गुटबाजी तेज हो गई है।
- चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक सोशल मीडिया पर 'सारा पंजाब चन्नी नाल' का नारा दे रहे हैं।
- भूपेश बघेल ने दिल्ली में केसी वेणुगोपाल को राज्य इकाई में गुटबाजी पर रिपोर्ट सौंपी है।
- आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर लगभग 80 नेताओं का समूह असंतुष्ट है।
पंजाब की राजनीति में एक बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। जालंधर के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की गई, जिसमें चन्नी के साथ कई नेता नजर आए और कैप्शन दिया गया - "सारा पंजाब चन्नी नाल" (पूरा पंजाब चन्नी के साथ)। यह प्रदर्शन सीधे तौर पर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारींग के नेतृत्व को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।
नेतृत्व को लेकर गहरा असंतोष
कांग्रेस के भीतर यह दरार तब और गहरी हो गई जब पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने दिल्ली में एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल को राज्य इकाई में बढ़ती गुटबाजी पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। पार्टी के एक बड़े धड़े का मानना है कि राजा वारींग को अध्यक्ष पद पर बनाए रखना गलत निर्णय है। चन्नी खेमे के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि वे वारींग के नेतृत्व में काम करने को तैयार नहीं हैं और वे चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं।
बढ़ता हुआ असंतोष और राजनीतिक समीकरण
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विद्रोही खेमे में लगभग 80 नेता शामिल हैं, जिनमें कई विधायक भी शामिल हैं। इस गुट को परताप सिंह बजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह और अरुणा चौधरी जैसे कद्दावर नेताओं का समर्थन प्राप्त है। चन्नी ने हाल ही में विपक्ष के नेता परताप सिंह बजवा से भी मुलाकात की, जो उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत है।
आगामी चुनावों पर प्रभाव
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पार्टी के भीतर यह विभाजन कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकता है। हालांकि भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि नेतृत्व का निर्णय बदलना इतना आसान नहीं है, लेकिन पार्टी के भीतर की यह लड़ाई चुनावी मैदान में कांग्रेस की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते इस गतिरोध को नहीं सुलझाया गया, तो पंजाब में कांग्रेस का भविष्य संकट में पड़ सकता है।