तेलंगाना में भाजपा ने विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) को एक महीने और बढ़ाने की मांग की है, क्योंकि वर्तमान प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं में असहजता और भ्रम उत्पन्न हो रहा है। पार्टी ने मतदान सूची में नाम हटाने, घर नंबर बदलने और विदेशी प्रवासियों की छद्म सूची जैसी समस्याओं को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भर्ती प्रक्रिया में 2002 की सूची से लिंक करने की सख्त शर्त ने मतदाताओं में चिंता पैदा की।
  • भर्ती में 7,000 नामों के हटाए जाने और घर नंबर बदलने की रिपोर्टें प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं।
  • भर्ती में बाहरी वरिष्ठ निरीक्षकों की नियुक्ति और बहुभाषी गाइडलाइन की मांग की गई है।

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार को विशेष तीव्र पुनरावलोकन (Special Intensive Revision – SIR) के विस्तार की मांग करते हुए एक आधिकारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, श्री सी. सुंदरन रेड्डी को संबोधित करते हुए, पार्टी ने बताया कि 2002 की मूल वोटर सूची से वर्तमान विवरण को जोड़ने की कठोर शर्त ने वास्तविक मतदाताओं के लिए बड़ी बाधा और तनाव उत्पन्न किया है।

पृष्ठभूमि और प्रक्रिया की जटिलता

SIR, जो आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में मतदान सूची को सटीक बनाने के लिए किया जाता है, पिछले वर्षों में कई बार विवादों का केंद्र रहा है। इस बार भी, कई बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करने के बजाय स्थायी स्थानों से काम किया, जिससे विशेषकर ग्रामीण इलाकों में मतदाता पहचान में गड़बड़ी हुई। इतिहास बताता है कि ऐसी प्रक्रियात्मक त्रुटियों से चुनावी परिणामों की वैधता पर सवाल उठते रहे हैं।

भर्ती में अनुचित हटाव और घर नंबर परिवर्तन

भर्ती प्रक्रिया के दौरान करिमनगर में लगभग 7,000 नामों को समानता के आधार पर हटाए जाने की बात पार्टी ने उजागर की। यह कदम, जब स्वयं SIR अभी जारी था, ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को ‘मजाक’ बनाने की शिकायत को जन्म दिया। इसके अलावा, करिमनगर में घर नंबरों को जानबूझकर बदलने की रपटें आई हैं, जिससे कई नागरिकों को मतदान का अधिकार से वंचित किया गया।

भर्ती की पारदर्शिता और सुधार के प्रस्ताव

भर्ती में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, BJP ने हैदराबाद, रंगा रेड्डी और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों में बाहरी वरिष्ठ अधिकारियों को निरीक्षक नियुक्त करने की मांग की है। यह कदम संभावित पक्षपात को कम करने और प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बहाल करने के उद्देश्य से किया गया है। साथ ही, पार्टी ने राज्य गुप्तचर एजेंसी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ बैठक का प्रस्ताव रखा है, ताकि विदेशी प्रवासियों की संभावित सम्मिलन को रोका जा सके।

भविष्य की दिशा और संभावित प्रभाव

यदि यह विस्तार मंजूर हो जाता है, तो आगामी विधानसभा चुनावों में अधिक सटीक और समावेशी मतदान सूची तैयार होने की संभावना है। हालांकि, समयसीमा के भीतर इस प्रक्रिया को पूर्ण करना चुनावी कैलेंडर को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पुनः परखनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुधारात्मक मांगें लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाती हैं, परन्तु उन्हें प्रभावी कार्यान्वयन की जरूरत है।