अमरावती के राजधानी परियोजना में ज़मीनी अधिग्रहण के लिए किसानों को न्यायसंगत मुआवजा देने की आवश्यकता पर बोलिसेट्टी सत्यानारायण ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा बाजार मूल्य के दोगुने पर मुआवजा देना चाहिए, न कि एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ जैसा भ्रमित किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अमरावती में भूमि अधिग्रहण के लिए 2013 के अधिनियम के अनुसार 100% सॉलैटियम लागू होना चाहिए।
  • किसानों को वर्तमान बाजार मूल्य से दोगुना मुआवजा मिलने का अधिकार है, जो लगभग ₹10.10 करोड़ प्रति एकड़ है।
  • यदि अधिग्रहण कम मुआवजे पर किया गया तो फोरम कानूनी कार्रवाई करेगा।

बोलिसेट्टी सत्यानारायण, जल बिरादरी राष्ट्रीय समन्वयक और भूमि अधिग्रहण अधिनियम संरक्षण मंच के सदस्य, ने अमरावती में भूमि अधिग्रहण के नियमों के कड़ाई से पालन की अपील की। उन्होंने बताया कि 2013 के "न्यायसंगत मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम" के तहत किसानों को 100% सॉलैटियम मिलना चाहिए, जिससे मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य से दोगुना हो जाएगा।

पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

अमरावती में 2019 से 2025 के बीच कई पंजीकृत बिक्री दस्तावेज़ों के अनुसार, शहरी कोर में जमीन की औसत कीमत लगभग ₹5.05 करोड़ प्रति एकड़ थी। इस कीमत पर 100% सॉलैटियम जोड़ने पर कुल मुआवजा ₹10.10 करोड़ प्रति एकड़ बनता है, जो अधिनियम की शर्तों के अनुरूप है। फिर भी, किसानों को केवल ₹1 करोड़ प्रति एकड़ का वादा किया जा रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर असंतोष उत्पन्न हो रहा है।

अधिग्रहण प्रक्रिया में कमियां

सत्यानारायण ने आरोप लगाया कि राजधानी क्षेत्र में मूल पंजीकरण मूल्यों को पिछले 12 वर्षों से अपडेट नहीं किया गया है, और अधिग्रहण प्रक्रिया में सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (Social Impact Assessment) नहीं किया गया। इसके अलावा, पहले चरण में 54,000 एकड़ में से लगभग 13,000 एकड़ नदी के बिस्तर या बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में स्थित हैं, जिन्हें राष्ट्रीय हरित न्यायालय (National Green Tribunal) द्वारा निर्माण पर प्रतिबंधित किया गया है।

संभावित कानूनी कार्रवाई

फोरम ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार या विकास एजेंसी अधिनियम के अनुसार निर्धारित मुआवजा नहीं देती, तो वे न्यायालय में मामला दायर करेंगे। यह कदम न केवल किसानों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि राज्य की भूमि नीतियों में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने में भी मदद करेगा।

भविष्य की दिशा

अमरावती की राजधानी निर्माण की गति को देखते हुए, इस मुद्दे का समाधान जल्दी होना आवश्यक है। यदि सरकार उचित मुआवजा प्रदान करती है और अधिग्रहण प्रक्रिया में सामाजिक एवं पर्यावरणीय पहलुओं को सम्मिलित करती है, तो यह न केवल स्थानीय किसानों के विश्वास को पुनः स्थापित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण नीतियों के लिए एक मानक भी स्थापित करेगा।