केन्द्रीय सरकार ने 19 जुलाई को सभी पक्षों की बैठक और 21 जुलाई को NDA पार्लियामेंटरी पार्टी मीटिंग बुलाकर दो‑तीहाई बहुमत सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है, जिससे महिलाओं के लिए आरक्षण वाला संशोधन पास हो सके।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- संविधान (131वां संशोधन) बिल को दो‑तीहाई बहुमत चाहिए।
- SP, DMK, TMC जैसे छोटे दलों का समर्थन निर्णयात्मक है।
- सरकार ने 19 और 21 जुलाई को रणनीतिक बैठकें निर्धारित की हैं।
जैसे ही भारत की मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाली है, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) बिल को दो‑तीहाई बहुमत के साथ पारित करने के लिए एक व्यापक राजनैतिक अभियान शुरू किया है। इस बिल का उद्देश्य लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है, जो कि आगामी सीमांकन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। अप्रैल के विशेष सत्र में आवश्यक बहुमत न मिलने के बाद, सरकार ने अब अपने समर्थन आधार को विस्तारित करने के लिए कई छोटे‑मध्यम दलों को राजी करने की रणनीति अपनाई है।
मुख्य आँकड़े और लक्ष्य
लोकसभा की कुल प्रभावी शक्ति 540 सदस्य है, इसलिए दो‑तीहाई बहुमत के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। वर्तमान में NDA की ताकत लगभग 299 सांसदों की है, जिसमें शिव सेना‑UBT के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। सरकार ने संभावित सहयोगियों की सूची तैयार की है:
- NCPI – 20 सांसद
- DMK – 22 सांसद
- YSRCP – 4 सांसद
- स्वतंत्र – 1 सांसद
इन सभी को जोड़ने पर संभावित संख्या 346 तक पहुँच सकती है। शरद पवार के नेतृत्व वाला NCP यदि 8 सांसदों को जोड़ ले, तो यह 354 हो जाएगी। शिव सेना‑UBT के तीन सांसदों का समर्थन भी “मुद्दा‑आधारित” रूप में माना जा रहा है, जबकि ट्रिनामूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सदस्य अंतिम अंतर को पाटने में मदद कर सकते हैं।
राजनीतिक दलों की स्थिति
समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिल के समर्थन की इच्छा जताई है, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों। ड्राविड़ीयन मुन्त्री कोंगल (DMK) ने सीमांकन प्रक्रिया के प्रति हमेशा सतर्कता बरती है, परन्तु उनके 22 सांसद अभी भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं। शिव सेना‑UBT ने मुद्दा‑आधारित समर्थन का संकेत दिया है, जिससे उनकी तीन सीटें भी अंतिम गणना में मायने रख सकती हैं।
सरकारी रणनीति और आगामी बैठकें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 21 जुलाई को NDA पार्लियामेंटरी पार्टी मीटिंग में संबोधित करने की उम्मीद है, जहाँ वह गठबंधन के सभी सदस्यों को अपने लक्ष्य के महत्व पर पुनः बल देंगे। 19 जुलाई को आयोजित सभी‑पक्षीय बैठक में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबिन और संगठन जनरल सचिव बी.एल. संतोश सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने रणनीतिक चर्चा की। इस मंच ने सरकार को विभिन्न दलों की मांगों को समझने और संभावित समझौते को परिष्कृत करने का अवसर दिया।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि सरकार दो‑तीहाई बहुमत हासिल कर लेती है, तो महिलाओं के लिए आरक्षण वाला संविधान संशोधन जल्दी ही संसद में पारित हो सकता है, जिससे आगामी सीमांकन प्रक्रिया में नई राजनीतिक गतिशीलता उत्पन्न होगी। दूसरी ओर, यदि गठबंधन दलों के बीच समझौता विफल रहता है, तो यह सरकार की विधायी क्षमता पर सवाल उठाएगा और आगामी राज्य‑स्तरीय चुनावों में उसका प्रभाव कम कर सकता है।