दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनिश सिसोदिया और दुर्गेश पाथक को दो हफ़्ते के भीतर CBI की याचिका पर जवाब देने का आखिरी मौका दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला पर्याप्त रूप से विलंबित हो चुका है और अब न्याय की स्वार्थ में अंतिम अवसर प्रदान किया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाथक को दो सप्ताह में जवाब देने का अंतिम अवसर
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI की याचिका का समर्थन किया
- हाई कोर्ट ने 17 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की
दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 जुलाई को AAP के प्रमुख नेताओं – अरविंद केजरीवाल, मनिश सिसोदिया और दुर्गेश पाथक – को CBI द्वारा दायर याचिका के जवाब के लिए दो सप्ताह की अंतिम समय सीमा दी। यह आदेश उस शराब नीति (एक्साईज़) मामले के संबंध में आया है, जिसमें उच्च न्यायालय ने पहले के ट्रायल कोर्ट के आदेश को उलटते हुए नेताओं को मुक्त कर दिया था।
पृष्ठभूमि और न्यायिक प्रक्रिया
यह विवाद 2024 में शुरू हुआ जब CBI ने दिल्ली के एक्साईज़ नीति को लेकर कई आरोपों के तहत AAP नेताओं पर जांच शुरू की। प्रारंभिक ट्रायल कोर्ट ने 2025 में उनके खिलाफ आरोपों को खारिज कर दिया, परंतु CBI ने उच्च न्यायालय में पुनरावलोकन याचिका दायर की। इस बीच, हाई कोर्ट के वकीलों ने जिला अदालतों की वित्तीय अधिकार सीमा को बढ़ाने के विरोध में कार्य बंदी की, जिससे सुनवाई में कई बार देरी हुई।
सॉलिसिटर जनरल का बयान
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI की ओर से कहा कि तीनों नेताओं को पहले कई अवसर प्रदान किए जा चुके थे, परंतु वे लगातार जवाब देने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि “मामला पर्याप्त रूप से विलंबित हो चुका है” और न्याय के हित में अब अंतिम अवसर दिया गया है। इस बयान ने कोर्ट को तेज़ी से निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।
कोर्ट का अंतिम आदेश
जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि “यदि मैं कोई तिथि देता हूँ, तो यह स्पष्ट होगा कि वे उत्तर देने के लिए स्वतंत्र हैं” और दो हफ़्ते के भीतर लिखित उत्तर प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया। सुनवाई की नई तिथि 17 अगस्त निर्धारित की गई है, जिसमें CBI की ओर से प्रस्तुत तर्कों पर चर्चा होगी।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि केजरीवाल, सिसोदिया और पाथक अपने उत्तर में प्रभावी प्रतिवाद पेश नहीं करते हैं, तो CBI की याचिका को स्वीकार कर हाई कोर्ट संभावित रूप से नई सज़ा या अतिरिक्त जांच का आदेश दे सकता है। यह निर्णय न केवल दिल्ली की राजनैतिक गतिशीलता बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी AAP के प्रतिमान को प्रभावित कर सकता है।