कोरोहेल्थ ने कोझिकोड में लगभग 800 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया, जिसे हिंद मजदूर सभा (HMS) ने राज्य सरकार की उपेक्षा के कारण अवैध कहा। HMS ने नई राष्ट्रीय श्रम कोड के तहत 'हायर‑एंड‑फ़ायर' नीति को रद्द करने की मांग की और उद्योग मंत्री को हस्तक्षेप के लिए बुलाया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोरोहेल्थ ने कोझिकोड में 800 कर्मचारियों को बर्खास्त किया
  • हिंद मजदूर सभा ने इस कार्रवाई को अवैध घोषित किया
  • उद्योग मंत्री से 'हायर‑एंड‑फ़ायर' नीति पर पुनर्विचार की मांग

कोझिकोड, 16 जुलाई—कोरोहेल्थ ने एक ही दिन में लगभग 800 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया, जिससे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। हिंद मजदूर सभा (HMS) के राज्य सचिव बिझु एंथोनी ने इस बर्खास्तगी को "अवैध" कहा और आरोप लगाया कि कंपनी ने केरल सरकार की चेतावनियों को नजरअंदाज किया।

प्रदर्शन का स्वरूप और मांगें

कोरोहेल्थ के कार्यालय के सामने HMS ने एक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित किया, जहाँ एंथोनी ने "हायर‑एंड‑फ़ायर" नीति को पूरी तरह से रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह नीति केंद्र सरकार के नए श्रम कोड का हिस्सा है, जो कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। एंथोनी ने उद्योग मंत्री पी.के. कुन्हालिकुट्टी से इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने और बर्खास्त कर्मचारियों को पुनः नियुक्त करने का आग्रह किया।

पृष्ठभूमि: कोरोहेल्थ और श्रम कोड

कोरोहेल्थ, जो स्वास्थ्य‑सेवा क्षेत्र में कार्य करता है, ने पिछले कुछ महीनों में लागत घटाने के लिए व्यापक पुनर्गठन शुरू किया। नई राष्ट्रीय श्रम कोड, जिसे हाल ही में लागू किया गया है, कंपनियों को अधिक लचीला “हायर‑एंड‑फ़ायर” अधिकार देता है, लेकिन यह कई ट्रेड यूनियनों द्वारा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस संदर्भ में, कोरोहेल्थ की कार्रवाई को केवल व्यावसायिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रम नीतियों के प्रति एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य की प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव

केरल सरकार ने इस बर्खास्तगी पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, परन्तु राज्य के प्रमुख उद्योग विभाग ने कहा कि वे इस मामले की जाँच करेंगे। यदि बर्खास्त कर्मचारियों को पुनः नियुक्त नहीं किया गया, तो यह न केवल श्रम आंदोलन को और प्रज्वलित करेगा, बल्कि राज्य में निवेशकों की धारणा पर भी असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों की राय

श्रम कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बड़े पैमाने पर बर्खास्तगी, यदि उचित कारणों और प्रक्रिया के बिना की गई हो, तो भारतीय श्रम न्यायालय में चुनौती का सामना कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई श्रम कोड के तहत कंपनियों को सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन बनाते हुए कर्मचारियों के पुनर्योजन पर ध्यान देना आवश्यक है।