केरल हाई कोर्ट ने त्रवनकोर देवस्वामि बोर्ड (TDB) को सैबरीमाला के सभी संपत्तियों की डिजिटल इन्वेंटरी बनाने का आदेश दिया। यह निर्णय मौजूदा खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियामक अनुपालन को सुदृढ़ करने के लिए लिया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल हाई कोर्ट ने TDB को डिजिटल इन्वेंटरी प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया।
  • सभी खरीद प्रक्रियाओं को सार्वजनिक खरीद नियमों के अनुरूप होना अनिवार्य किया गया।
  • प्रोजेक्ट की लागत ₹1.66 करोड़ है और 1,000 डबल-डेकर बेड्स की खरीद का मामला प्रमुख है।

केरल हाई कोर्ट ने त्रवनकोर देवस्वामि बोर्ड (TDB) को सैबरीमाला संतिधाम और उससे जुड़े संस्थानों में रखी गई सभी उपभोग्य एवं गैर‑उपभोग्य वस्तुओं की एक व्यापक, प्रणालीबद्ध और डिजिटल इन्वेंटरी प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने का आदेश दिया। यह आदेश 16 जुलाई 2026 को कोच्चि में प्रकाशित हुआ।

पृष्ठभूमि और कोर्ट का आदेश

निर्णय एक द्विपक्षीय बेंच—जस्टिस राजा विजयरघवन V. और जस्टिस K.V. जयकुमार—द्वारा पारित किया गया, जो 1,000 डबल‑डेकर स्टील बेड्स की आपूर्ति के अनुबंध को मंजूरी देने के साथ-साथ ऑडिट विभाग द्वारा उठाए गए प्रश्नों को सुनते हुए आया। कुल अनुमानित लागत ₹1.66 करोड़ थी, जिसके लिए TDB ने प्रशासनिक मंजूरी दी थी।

खरीद प्रक्रिया में आई कमियों की ओर इशारा

ऑडिट विभाग ने यह उजागर किया कि बेड्स को तमिलनाडु के एक निर्माता से खरीदा जाना था, परंतु न तो उसकी तस्वीरें और न ही विस्तृत तकनीकी विनिर्देश ओम्बड्समैन के सामने प्रस्तुत किए गए थे। साथ ही, निविदा प्रक्रिया को बहुत देर से शुरू किया गया था, जिससे पारदर्शिता में गंभीर कमी आई। कोर्ट ने त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया, यह कहते हुए कि TDB जैसी संस्था में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

डिजिटल परिवर्तन और नियामक अनुपालन

न्यायालय ने मुख्य अभियंता और कार्यकारी अभियंता को निर्देश दिया कि वे सभी खरीद को स्वीकृत तकनीकी विनिर्देशों, स्टोर खरीद मैनुअल और सार्वजनिक खरीद मानदंडों के अनुसार सुनिश्चित करें। साथ ही, TDB को अपना मौजूदा एंटरप्राइज़ डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन प्रोग्राम के तहत चल रही डिजिटलकरण प्रक्रिया को पूर्ण करने का निर्देश दिया गया, जिससे सभी इन्वेंटरी और एसेट प्रबंधन रजिस्टर को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सके।

भविष्य में संभावित प्रभाव

यह आदेश न केवल सैबरीमाला के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि अन्य देवस्थान और सार्वजनिक संस्थानों में भी डिजिटल इन्वेंटरी अपनाने की मिसाल स्थापित करेगा। यदि सफल रहा, तो यह सार्वजनिक निधियों के बेहतर उपयोग, भ्रष्टाचार में कमी और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।