सरकार मानसून सत्र में 'वंदे मातरम' के अपमान को रोकने के लिए नया विधेयक पेश करेगी, जबकि महत्वपूर्ण सीमांकन और संवैधानिक संशोधन बिलों की सूची से बाहर रखे गए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- वंदे मातरम के जानबूझकर अपमान या व्यवधान को दंडनीय बनाने के लिए 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक' पेश किया जाएगा।
- लोकसभा सीटों के सीमांकन और प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री की जेल की स्थिति पर संवैधानिक संशोधन विधेयकों को वर्तमान सूची में शामिल नहीं किया गया है।
- सरकार आयकर, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश करेगी।
नई दिल्ली में आगामी मानसून सत्र के लिए सरकार ने विधायी एजेंडा जारी कर दिया है। इस सत्र का सबसे चर्चित विषय 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' होने वाला है। यह विधेयक 1971 के मौजूदा कानून में संशोधन कर 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान जानबूझकर किए गए अपमान या व्यवधान को एक दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव रखता है।
विवादास्पद विधेयकों पर चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि सरकार ने इस सत्र में दो अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों को सूची में शामिल नहीं किया है। पहला, 130वां संवैधानिक संशोधन विधेयक, जो किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति (प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित) को 30 दिनों तक जेल में रहने पर स्वतः पद से हटाने का प्रावधान करता है। यह विधेयक वर्तमान में भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के पास विचाराधीन है।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक है, जो महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों के सीमांकन (Delimitation) से संबंधित है। पिछले सत्र में विपक्ष के कड़े विरोध के कारण यह बिल विफल रहा था। सरकार ने इस सत्र में इसके संशोधित संस्करण को लाने के बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं।
अन्य विधायी प्राथमिकताएं
मानसून सत्र के दौरान सरकार कुछ अन्य प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। इनमें आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और विदेशी अंशदान (FCRA) से संबंधित संशोधन भी चर्चा का केंद्र रहेंगे।
संसद के इस सत्र में विपक्ष द्वारा राम मंदिर दान मुद्दे और सीमांकन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी संभावना है, जिससे सदन के भीतर और बाहर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।