कांग्रेस सांसद पवन खेरा ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्र सरकार की 'संवेदनहीनता' की कड़ी आलोचना की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांग्रेस सांसद पवन खेरा ने भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
- वांगचुक परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं।
- सोनिया गांधी के निर्देश के बाद कांग्रेस ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
- विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध की भाषा न समझने का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पवन खेरा ने शुक्रवार को प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों के पैरोकार सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सोनिया गांधी का हस्तक्षेप और ऐतिहासिक संदर्भ
कांग्रेस के इस कदम के पीछे पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मानसून सत्र से पहले आयोजित संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्टी को वांगचुक के आंदोलन का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में 1984 की एक ऐतिहासिक घटना का भी उल्लेख किया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लद्दाख के मुद्दों को सुलझाने के लिए स्वयं लह में जाकर वांगचुक के पिता से मुलाकात की थी।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग
सोनम वांगचुक की यह भूख हड़ताल 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। उनका मुख्य उद्देश्य देश की वर्तमान परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाना और हाल के वर्षों में हुए पेपर लीक के मामलों के लिए जवाबदेही तय करना है। वांगचुक का कहना है कि केवल इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर गंभीर बहस करनी चाहिए और शिक्षाविदों को शामिल कर सुधारों की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।
केंद्र पर 'संवेदनहीनता' का आरोप
मुलाकात के बाद पवन खेरा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक विरोध की भाषा को समझने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा, "हम वांगचुक और उनके साथ बैठे छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। एक संवेदनहीन सरकार के सामने विरोध के तरीकों को और अधिक विकसित करना होगा।" कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (UBT) जैसे कई विपक्षी दल भी इस आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखा रहे हैं।