नैनीताल नगर पालिका ने बाहर से आने वाली सभी बाइकों और स्कूटरों पर ₹100 का प्रवेश कर लागू किया, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों में तीव्र विरोध दिख रहा है। यह कदम राजस्व बढ़ाने के नाम पर आया है, लेकिन सामाजिक और पर्यटन प्रभावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नैनीताल ने दोपहिया वाहनों पर ₹100 प्रवेश शुल्क लागू किया
  • स्थानीय निवासी और पर्यटक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं
  • टैक्स में छूट केवल यूके‑04 पंजीकृत स्थानीय वाहनों को

17 जुलाई 2026 को रात 12 बजे से लागू हुई नई नगर पालिका नीति के तहत नैनीताल के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं – तल्लीताल लेक ब्रिज, बारापत्थर और फांसी गधेरा – पर दोपहिया वाहनों (बाइक व स्कूटर) से ₹100 का कर वसूला जा रहा है। इस के साथ चारपहिया स्थानीय वाहनों पर ₹200 और बाहरी चारपहिया व बड़े वाहनों पर ₹300 का शुल्क लागू किया गया।

पृष्ठभूमि और वित्तीय दबाव

पर्यटन राजधानी के रूप में प्रसिद्ध नैनीताल ने पहले भी पार्किंग शुल्क और ग्रीन टैक्स से राजस्व जुटाया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, नगरपालिका को 2024‑2027 में संरचनात्मक घाटे को पाटने के लिए अतिरिक्त आय की आवश्यकता थी, जिसके चलते इस तरह का नया कर प्रावधान किया गया। इस नीति को लागू करने का ठेका 24.55 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत गाज़ियाबाद स्थित एमजी इन्फ्रा को दिया गया, जबकि बोर्ड की अनुमति बिना यह अनुबंध 16 जुलाई को ही सौंप दिया गया, जिससे स्थानीय प्रतिनिधियों में गुस्सा भड़का।

स्थानीय प्रतिक्रिया

नैनीताल के निवासी और पर्यटक सामाजिक मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग सवाल कर रहे हैं कि "क्या अब पैदल चलने और सांस लेने पर भी टैक्स देना पड़ेगा?" स्थानीय सदस्य जितेंद्र पाण्डेय ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर विरोध किया और नगरपालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल को लिखित आश्वासन मांगा कि बिना बोर्ड की मंजूरी के कोई अनुबंध नहीं दिया जाएगा।

पर्यटन पर संभावित असर

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी अतिरिक्त शुल्कें यात्रा लागत बढ़ा कर संभावित आगंतुकों को हतोत्साहित कर सकती हैं। भारत के अन्य पहाड़ी स्थलों, जैसे शिमला और मनाली, में समान करों को लेकर यात्रियों की संख्या में गिरावट देखी गई है। यदि नैनीताल में भी इस प्रवृत्ति जारी रहती है, तो स्थानीय व्यवसाय, होटल और रेस्तरां पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

आगे का रास्ता

वर्तमान में कई सामाजिक समूह और नागरिक संगठनों ने न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी की है, जबकि कुछ प्रतिनिधि वैकल्पिक राजस्व मॉडल – जैसे पर्यावरणीय शुल्क का पुनर्मूल्यांकन या स्थानीय व्यापारियों के साथ साझेदारी – का प्रस्ताव दे रहे हैं। नीति निर्माता को स्थानीय हितों को संतुलित करते हुए, सतत पर्यटन विकास के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता को भी ध्यान में रखकर पुनर्विचार करना आवश्यक दिख रहा है।