उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए गोदावरी जल के अधिकतम उपयोग के लिए SRLIP परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पिछले सरकार के खर्चीले पुनःडिज़ाइन को आलोचना करते हुए, परियोजना की लागत‑प्रभावी पूर्णता की राह तय की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- SRLIP परियोजना को तेज़ी से पूरा करने का राज्य का संकल्प।
- गोदावरी जल का ग्रैविटी और लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से अधिकतम उपयोग।
- पूर्व सरकार के अतिरिक्त खर्च पर आलोचना और लागत‑प्रभावी पूर्णता की दिशा।
उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने सिता राम लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट (SRLIP) के कार्यों की जाँच करते हुए राज्य सरकार की जल नीति में नई दिशा की घोषणा की। जलवायु परिवर्तन द्वारा उत्पन्न जल संकट को देखते हुए, उन्होंने बताया कि गोदावरी नदी के जल को ग्रैविटी‑आधारित और लिफ्ट‑इरिगेशन परियोजनाओं के माध्यम से अधिकतम उपयोग किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
दक्षिण भारत में गोदावरी जल को कई लिफ्ट इरिगेशन स्कीमों में उपयोग किया जा रहा है, जिसमें देवडुला लिफ्ट इरिगेशन, राजीव और इंदिरा सागर लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं। विक्रमार्क ने बताया कि इन सभी परियोजनाओं में पम्पों को पूर्ण क्षमता पर चलाकर 12 जिलों और 17 विधानसभा क्षेत्रों में 22 जलाशयों को भरा गया है।
SRLIP की त्वरित पूर्णता की दिशा में कदम
भट्टी ने अधिकारियों को SRLIP कार्यों को शीघ्रता से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल का अंतिम बिंदु तक पहुँचना, विशेषकर टेल‑एंड आयाकुट तक, राज्य की प्राथमिकता है। याटालाकुंटा टनल और अम्मागरिपल्ली पम्पहाउस की जाँच के दौरान उन्होंने यह बात दोहराई कि एक महीने के व्यापक कार्य‑योजना के तहत नियमित समीक्षा की जा रही है।
पूर्व सरकार की आलोचना और लागत‑समीक्षा
विक्रमार्क ने पिछली बीआरएस सरकार द्वारा परियोजनाओं के पुनःडिज़ाइन को ‘धन लूट’ कहा, जिसमें अतिरिक्त सेथम्मा सागर बैरेज जोड़ने से लागत लगभग ₹24,000 करोड़ तक बढ़ी। उन्होंने बताया कि पहले केवल लगभग ₹1,505 करोड़ की आवश्यकता थी, जबकि अब खर्च बहुत अधिक हो गया है। कांग्रेस सरकार ने इन परियोजनाओं की समीक्षा की और सार्वजनिक निवेश को बचाते हुए पूर्णता का निर्णय लिया।
भविष्य की योजना और वित्तीय समर्थन
राजीव नहर को सागर नहर से जोड़ना, लिंक नहरों और टनलों के माध्यम से वायरा व पालयर जलाशयों को भरना, तथा सतहुप्पली तक इरिगेशन विस्तार जैसे कार्य जारी हैं। जमीन अधिग्रहण और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए फंड तुरंत जारी करने की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार, तेलंगाना जल नीति में सतत विकास और जल सुरक्षा को प्रमुखता दी जा रही है।