संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज के संबोधन में कहा कि चीन ने 2020 चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की संवेदनशील जानकारी चुराई। उन्होंने फेडरल एजेंसियों की निष्क्रियता पर प्रश्न उठाते हुए चुनावी सुरक्षा में तेज सुधार की मांग की।

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ट्रंप का आरोप: चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा चोरी किया
  • वोटर रजिस्ट्रेशन में गैर‑नागरिक और मृत व्यक्तियों के नाम शामिल
  • फेडरल एजेंसियों – FBI, CIA, DHS – की जांच पर ट्रंप ने दबाव बनाया

संयुक्त राज्य के 46वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज के राष्ट्रीय संबोधन में एक गंभीर आरोप लगाया – चीन ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का व्यक्तिगत डेटा चुराया। यह दावा, जो चुनावी सुरक्षा के सबसे बड़े उल्लंघन को दर्शाता है, पहले से ही राजनीतिक माहौल को और अधिक तीव्र बना रहा है।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

2020 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद, कई रूढ़िवादी समूह और ट्रंप के समर्थकों ने विदेशी हस्तक्षेप, विशेषकर चीन और रूसी सरकारों द्वारा, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का सवाल उठाया था। हालांकि, आधिकारिक जांचों ने बड़े पैमाने पर व्यवधान का प्रमाण नहीं दिया। इस नई घोषणा के साथ, ट्रंप ने फिर से उन रिपोर्टों को उजागर करने का प्रयास किया जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुईं।

डेटा चोरी का विवरण

ट्रंप ने बताया कि चीन ने मतदाता नाम, पते, फोन नंबर और राजनीतिक झुकाव सहित विस्तृत प्रोफ़ाइल हासिल की। उन्होंने कहा कि इस जानकारी को प्राप्त करने के लिए चीन ने एक विशेष “डेटा इकट्ठा करने वाली इकाई” स्थापित की थी, जो अमेरिकी राज्य और स्थानीय चुनावी अधिकारियों के डेटाबेस तक पहुँच बनाती है। यदि सत्य हो, तो यह अमेरिकी चुनावी सुरक्षा के इतिहास की सबसे बड़ी सेंध होगी।

फेडरल एजेंसियों पर आरोप

ट्रंप ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की समीक्षा में 2.78 लाख गैर-अमेरिकी नागरिकों को मतदाता के रूप में पंजीकृत पाया, और कहा कि कई डेमोक्रेट‑शासित राज्यों ने वोटर रिकॉर्ड साझा नहीं किए। इसके अलावा, उन्होंने FBI, CIA और ODNI को “डीप स्टेट” के साथ मिलकर जानकारी को छिपाने का आरोप लगाया, जिससे जनता को वास्तविक खतरे का पता नहीं चल पाया।

भविष्य की नीति दिशा

संबोधन में ट्रंप ने “SAFE America Act” के त्वरित पारित होने की मांग की, जिसमें प्रत्येक मतदाता के लिए नागरिकता प्रमाण अनिवार्य करने और मेल‑इन बैलेट को केवल विशेष परिस्थितियों तक सीमित करने की व्यवस्था है। वह दावा करते हैं कि ये कदम मतदाता भरोसा बहाल करेंगे और भविष्य में ऐसी डेटा लीक को रोकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दावे को प्रमाणित किया जाता है, तो यह न केवल अमेरिकी राजनयिक संबंधों को, बल्कि अंतरराष्ट्रीय डेटा सुरक्षा मानकों को भी पुनः परिभाषित कर सकता है। इस बीच, कांग्रेस में इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो रही है, और दोनों पक्षों से कड़ी जाँच की उम्मीद की जा रही है।