NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली की सड़कों पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। राहुल गांधी ने दो बसों में 120 से अधिक विपक्षी सांसदों को लेकर गांधी स्मृति तक कूच किया, जहाँ पुलिस ने बैरिकेड बनाकर रुकावट डाली। अंत में अनुमति मिलने पर कूच समाप्त हुआ, और विपक्ष ने छात्रों के साथ अपना समर्थन दोहराया।
मुख्य बिंदु
- राहुल गांधी ने दो बसों में 120 सांसदों को गांधी स्मृति तक ले गए
- प्रदर्शन का कारण: NEET पेपर लीक और छात्रों के अधिकार
- दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाए, बाद में अनुमति दी
प्रदर्शन की रूपरेखा
23 जुलाई 2026 को, राहुल गांधी के 5, सुनेहरी बाग रोड स्थित आवास पर विपक्षी नेताओं का विशाल जमावड़ा जमा हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, और कई अन्य पार्टी के सांसदों ने दो सफेद बसों में सवार होकर गांधी स्मृति की ओर रुख किया।
मार्ग में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने बैरिकेड स्थापित कर बाड़ा लगाया, जिससे कूच कुछ घंटे तक रुका रहा। अंततः उच्च अधिकारियों की अनुमति मिलने पर काफिला आगे बढ़ा और गांधी स्मृति पर पहुँच कर राष्ट्रगान गाया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गांधी स्मृति को पहले भी विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक आंदोलनों के केंद्र बिंदु के रूप में इस्तेमाल किया गया है। 2020 में हुई छात्र विरोध प्रदर्शनों में भी इस स्थल को एकत्रित होकर आवाज़ उठाने के लिए चुना गया था, जिससे इस स्थान की प्रतीकात्मक महत्ता स्पष्ट होती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the coordinated bus convoy underscores a new level of opposition unity against the Modi government, especially on education policy. The visual of over a hundred MPs traveling together creates a powerful narrative of parliamentary solidarity with street‑level protests.
"Such mass parliamentary mobilization is rare in Indian politics and signals a strategic shift toward direct public engagement," says political analyst Dr. Ananya Sharma.
Frequently Asked Questions
- प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या था? NEET पेपर लीक के बाद छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा मंत्रालय के कार्यों पर सवाल उठाना।
- कूच के दौरान पुलिस ने कौन‑सी कार्रवाई की? बैरिकेड और निषेधाज्ञा के तहत बसों को रोकना, लेकिन बाद में अनुमति देकर कूच जारी किया गया।