यूरोपीय शोधकर्ताओं का आरोप है कि बिग टेक कंपनियां डेटा साझा करने में बाधा डाल रही हैं, जिससे चुनाव और समाज पर सोशल मीडिया के प्रभावों का अध्ययन करना लगभग असंभव हो गया है।

मुख्य बातें

  • यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) शोधकर्ताओं को डेटा एक्सेस का अधिकार देता है, लेकिन कंपनियां बाधाएं डाल रही हैं।
  • रोमानियाई चुनावों के दौरान टिकटॉक पर संदिग्ध प्रचार देखा गया, जिसे शोधकर्ता डेटा की कमी के कारण पूरी तरह नहीं समझ सके।
  • मेटा और एक्स (ट्विटर) जैसी कंपनियां डेटा एक्सेस के लिए भारी शुल्क या जटिल सुरक्षा शर्तें रख रही हैं।

यूरोपीय शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बिग टेक कंपनियों द्वारा डेटा तक पहुंच को सीमित करने से समाज पर सोशल मीडिया के हानिकारक प्रभावों का अध्ययन करना लगभग असंभव हो गया है। हालांकि यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) शोधकर्ताओं को डेटा प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि कंपनियां तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं के माध्यम से इस प्रक्रिया को विफल कर रही हैं।

रोमानियाई चुनाव और टिकटॉक का रहस्य

हाल ही में रोमानिया के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान, कैलिन जॉर्जकु नामक एक कम चर्चित राजनेता को टिकटॉक पर जबरदस्त प्रचार मिला। शोधकर्ताओं ने पाया कि फैशन और ब्यूटी से संबंधित खातों का उपयोग अचानक राजनीतिक प्रचार के लिए किया जाने लगा। मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी की एड्रियाना इयाम्निची ने इस दुष्प्रचार अभियान की जांच करने के लिए टिकटॉक से डेटा मांगा था, लेकिन उनकी درخواست को खारिज कर दिया गया।

BozokMedia विश्लेषण: यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल डेटा तक पहुंच का नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की सुरक्षा का है। यदि शोधकर्ता यह नहीं जान पाएंगे कि एल्गोरिदम कैसे काम करते हैं या विदेशी ताकतें (जैसे रूस) चुनावों को कैसे प्रभावित कर रही हैं, तो समाज इन 'डिजिटल ब्लैक होल' के प्रति असुरक्षित बना रहेगा।

"जब आपको उस प्रभाव की जांच करने के लिए डेटा की आवश्यकता होती है जो समाज को आकार दे रहा है, और वह डेटा निजी हाथों में होता है, तो इस क्षेत्र में शोध करना लगभग असंभव हो जाता है," इयाम्निची ने कहा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, कंपनियां अब 'पेवॉल' (Paywall) मॉडल अपना रही हैं। उदाहरण के लिए, X (पूर्व में ट्विटर) ने अपने API को इतना महंगा कर दिया है कि अकादमिक संस्थानों के लिए इसे वहन करना कठिन है। वहीं, मेटा ने अपने पुराने टूल 'CrowdTangle' को बंद करके नए और अधिक जटिल सिस्टम पेश किए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यूरोपीय संघ ने 2022 में डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) लागू किया था ताकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की जा सके। इसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन दो साल बाद भी, डेटा एक्सेस की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि शोधकर्ताओं को अक्सर अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।

क्या आप जानते हैं?: कुछ शोधकर्ताओं का दावा है कि डेटा एक्सेस के लिए कंपनियां ऐसी सुरक्षा शर्तें रखती हैं जिनके लिए इंटरनेट से पूरी तरह कटे हुए कंप्यूटरों की आवश्यकता होती है, जो अधिकांश विश्वविद्यालयों के पास नहीं होते।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) क्या है?
उत्तर: यह एक यूरोपीय कानून है जो सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध सामग्री और प्रणालीगत जोखिमों के प्रति अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए बनाया गया है।

प्रश्न 2: कंपनियां डेटा देने से क्यों कतरा रही हैं?
उत्तर: कंपनियां सुरक्षा कारणों, व्यावसायिक गोपनीयता और जटिल तकनीकी शर्तों का हवाला देकर डेटा साझा करने में देरी या इनकार करती हैं।