हुबली-धारवाड़ मेट्रोपॉलिटन सिटी फोरम ने नगर निगम (HDMC) के विभाजन के निर्णय को 'अवैज्ञानिक' बताते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फोरम का कहना है कि इस कदम से दोनों शहरों, विशेषकर धारवाड़ को भारी नुकसान होगा।
मुख्य बातें
- हुबली-धारवाड़ मेट्रोपॉलिटन सिटी फोरम ने HDMC के विभाजन का कड़ा विरोध किया है।
- विभाजन से नगर निगम की ग्रेडिंग 'B' से घटकर 'C' होने का खतरा है।
- फोरम ने इसे राजनीतिक द्वेष का परिणाम और नागरिकों के हितों के खिलाफ बताया है।
- विभाजन के खिलाफ व्यापक जन जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
हुबली-धारवाड़ में नगर निगम (HDMC) के विभाजन के प्रस्ताव ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। हुबली-धारवाड़ मेट्रोपॉलिटन सिटी फोरम ने इस निर्णय को पूरी तरह से 'अवैज्ञानिक' करार देते हुए एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। फोरम के पदाधिकारियों का तर्क है कि यह विभाजन दोनों जुड़वां शहरों, विशेष रूप से धारवाड़ के लिए विकास के द्वार बंद कर देगा।
फोरम के समन्वयक और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अरुण चरंतिमथ ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाजन के निर्णय में आम जनता को अंधेरे में रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हम केवल भावनाओं के आधार पर निर्णय लेते हैं, तो हम बहुत कुछ खो देंगे। उन्होंने कहा, "चुने हुए प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों और जनता के साथ विस्तृत चर्चा करने में विफलता दिखाई है।"
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हुबली-धारवाड़ का एकीकरण ही इसे एक बड़े महानगर के रूप में स्थापित करने की कुंजी है। वर्तमान में, HDMC के पास 10 लाख से अधिक की आबादी है और यह बेंगलुरु के बाद कर्नाटक का दूसरा सबसे बड़ा नगर निगम है। यदि इसे विभाजित किया जाता है, तो इसकी विकास क्षमता और मिलने वाला सरकारी फंड दोनों ही कम हो जाएंगे।
"विभाजन से शहरों की विकास क्षमता सिमट जाएगी और धारवाड़ को आर्थिक रूप से पिछड़ने का सामना करना पड़ेगा।"
फोरम के प्रवक्ता संतोष नरगुंड ने एक गंभीर आर्थिक पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में HDMC 'B' ग्रेड श्रेणी में है, लेकिन विभाजन के बाद दोनों शहरों को 'C' ग्रेड में डाउनग्रेड किया जा सकता है। इसका सीधा असर कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं पर पड़ेगा। इसके विपरीत, यदि शहरों को मिलाकर 'A' श्रेणी में अपग्रेड किया जाता है, तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाएगी।
विभाजन बनाम एकीकरण: एक तुलना
| विशेषता | एकीकृत HDMC (वर्तमान) | विभाजित शहर (प्रस्तावित) |
|---|---|---|
| नगर निगम ग्रेड | B ग्रेड | C ग्रेड (संभावित) |
| विकास क्षमता | उच्च (मेट्रोपॉलिटन) | सीमित (स्थानीय) |
| सरकारी फंड | अधिक आवंटन | कम आवंटन |
| संसाधन साझाकरण | बेहतर समन्वय | संसाधनों का बंटवारा |
पूर्व मेयर हनुमंत डंबल ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि हितधारकों से परामर्श किए बिना अंतिम अधिसूचना जारी की गई, तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। फोरम अब नागरिकों को विभाजन के नुकसानों के बारे में शिक्षित करने के लिए घर-घर जाकर अभियान चलाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. फोरम विभाजन का विरोध क्यों कर रहा है?
फोरम का मानना है कि विभाजन से शहरों की ग्रेडिंग कम हो जाएगी और विकास के अवसर छिन जाएंगे।
2. विभाजन का नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे सरकारी सुविधाओं में कमी आ सकती है और आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है।