कोलकाता में दिल्ली के छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए एकत्र हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत मिल गई है, जबकि ममता बनर्जी ने इसे सरकार का 'दिखावा' करार दिया है।
मुख्य बातें
- दिल्ली के छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कोलकाता में रैली करने की कोशिश कर रहे TMC नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
- एमएलए कुणाल घोष और अन्य वरिष्ठ नेताओं को लालबाजार पुलिस मुख्यालय से जमानत मिल गई है।
- ममता बनर्जी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल 'आंखों में धूल झोंकना' बताया है।
शनिवार, 25 जुलाई 2026 को कोलकाता में एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई प्रमुख नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए आयोजित एक सभा के दौरान हुई। कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए रैली की अनुमति देने से इनकार करने के बाद यह कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार किए गए नेताओं में एमएलए कुणाल घोष, वरिष्ठ नेता और कोलकाता नगर निगम पार्षद बैस्वर्णो चटर्जी शामिल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद भारी तनाव फैल गया। वरिष्ठ टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन सहित अन्य नेता लालबाजार पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, बाद में कुणाल घोष और अन्य नेताओं को जमानत मिल गई और उन्हें रिहा कर दिया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति और छात्र आंदोलनों के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती है। टीएमसी द्वारा छात्र आंदोलनों का समर्थन करना और उसके बदले पुलिस कार्रवाई का सामना करना, आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह न केवल राज्य में कानून-व्यवस्था के सवाल उठाता है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव को भी उजागर करता है।
"पुलिस की कार्रवाई छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के बीच एक गहरी खाई पैदा कर रही है," एक राजनीतिक विश्लेषक ने टिप्पणी की।
तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके नेताओं के साथ बदसलूकी की और रैली की अनुमति पहले मिल चुकी थी, जिसे अंतिम समय में रद्द कर दिया गया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल एक 'eyewash' (दिखावा) है और वह छात्रों से मिलने दिल्ली भी जाएंगी।
अतीत की पृष्ठभूमि
इससे ठीक एक दिन पहले, 24 जुलाई को कोलकाता की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का सैलाब उमड़ पड़ा था। शुक्रवार को हुई रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम छह मामले दर्ज किए गए थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: टीएमसी नेताओं को क्यों गिरफ्तार किया गया था?
उत्तर: दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रैली आयोजित करने की कोशिश के कारण, जिसे उच्च न्यायालय ने अनुमति नहीं दी थी।
प्रश्न 2: ममता बनर्जी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने इस्तीफे को केवल एक दिखावा बताया और कहा कि छात्रों का संघर्ष जारी रहेगा।