केरल में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है, जिसमें IUML नेता एम.सी. कमरउद्दीन पर 120 से अधिक मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न और हत्या जैसे गंभीर मामले भी सामने आए हैं।

मुख्य बातें

  • केरल में वर्तमान और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 555 मामले लंबित हैं।
  • IUML नेता एम.सी. कमरउद्दीन पर BUDS एक्ट के तहत 120 मामले दर्ज हैं।
  • थिरुवनंतपुरम में जन प्रतिनिधियों के खिलाफ सबसे अधिक 180 मामले लंबित हैं।
  • पांच जन प्रतिनिधियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप हैं, जबकि कुछ पर हत्या के मामले भी दर्ज हैं।

केरल उच्च न्यायालय में जिला न्यायपालिका द्वारा प्रस्तुत एक हालिया रिपोर्ट ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून, 2026 तक वर्तमान या पूर्व सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) के खिलाफ कुल 555 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 260 मामले सार्वजनिक शांति भंग करने से संबंधित हैं, जो अक्सर राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के दौरान दर्ज किए जाते हैं।

नेताओं पर गंभीर आरोप

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता और पूर्व विधायक एम.सी. कमरउद्दीन का है। उन पर लगभग 120 मामले लंबित हैं, जिनमें से अधिकांश 'बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट' (BUDS Act) के तहत दर्ज किए गए हैं। कमरउद्दीन 2019 के फैशन गोल्ड ज्वेलरी निवेश धोखाधड़ी मामले में भी आरोपी थे।

इसके अलावा, रिपोर्ट में पांच जन प्रतिनिधियों का नाम यौन उत्पीड़न के आरोपों में आया है, जिनमें कोवलम के विधायक एम. विंसेंट, पूर्व कज़ाकुट्टम विधायक एम.ए. वाहीद, थ्रिसूर सांसद सुरेश गोपी, पूर्व परस्सला विधायक ए.टी. जॉर्ज और कुन्नाथुनाडू विधायक वी.पी. सजींद्रन शामिल हैं।

क्षेत्रीय वितरण और अन्य मामले

केरल के विभिन्न जिलों में मामलों का वितरण असमान है। थिरुवनंतपुरम में सबसे अधिक 180 मामले लंबित हैं, इसके बाद कसगोड (133) और कन्नूर (50) का स्थान है। हत्या के गंभीर आरोप पूर्व कोथुपरांबा विधायक पी. जयराजन और पूर्व कल्लियसेरी विधायक टी.वी. राजेश पर भी दर्ज हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ते आपराधिक मामले लोकतांत्रिक जवाबदेही और कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब कानून बनाने वाले ही कानून तोड़ने के आरोपों से घिरे हों, तो यह सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करता है।

कानून के शासन को बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों की त्वरित सुनवाई अनिवार्य है।
क्या आप जानते हैं?: BUDS एक्ट का मुख्य उद्देश्य अवैध जमा योजनाओं के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी को रोकना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सबसे अधिक मामले किस जिले में हैं?
थिरुवनंतपुरम में जन प्रतिनिधियों के खिलाफ सबसे अधिक 180 मामले लंबित हैं।

2. BUDS एक्ट क्या है?
यह अनियंत्रित जमा योजनाओं पर रोक लगाने वाला कानून है, जिसका उपयोग धोखाधड़ी के मामलों में किया जाता है।