दक्कन कन्नड़ जिले में पिछले दो वर्षों से SC/ST निवारण बैठकें आयोजित न करने पर दलित कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ये बैठकें हर तीन महीने में होनी चाहिए।
मुख्य बातें
- दक्कन कन्नड़ प्रशासन ने लगभग दो वर्षों से SC/ST निवारण बैठकें आयोजित नहीं की हैं।
- कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि बैठकें हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएं।
- आदि द्रविड़ समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
- होम गार्ड के पदों पर भारी रिक्तियां हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मंगलोर में हाल ही में आयोजित एक संयुक्त बैठक के दौरान, दलित कार्यकर्ताओं ने दक्कन कन्नड़ (DK) जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कार्यकर्ता जगदीश पांडेश्वर ने आरोप लगाया कि प्रशासन पिछले लगभग दो वर्षों से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लिए विशेष निवारण बैठकें आयोजित करने में विफल रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उडुपी जिले की तर्ज पर, दक्कन कन्नड़ में भी ये बैठकें हर तीन महीने में आयोजित की जानी चाहिए।
बैठक के दौरान, कार्यकर्ता एस.पी. आनंद ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा आदि द्रविड़ उप-जातियों को अधिसूचित किए जाने के बावजूद, अधिकारी अभी भी जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आनाकानी कर रहे हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही वंचित समुदायों के अधिकारों और सरकारी योजनाओं के लाभ प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा बन रही है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि प्रशासनिक बैठकों में देरी सीधे तौर पर हाशिए पर रहने वाले समुदायों के न्याय तक पहुंच को बाधित करती है। जब निवारण तंत्र ही निष्क्रिय हो जाता है, तो शिकायतों का अंबार लग जाता है और सामाजिक असंतोष बढ़ता है।
प्रशासनिक ढिलाई केवल प्रक्रियात्मक देरी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय के प्रति संस्थागत उदासीनता का संकेत है।
पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे इन मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। पुलिस उपायुक्त (कानून और व्यवस्था) एच.एन. मिथुन ने कहा कि वे जिला प्रशासन की ओर से निवारण बैठक आयोजित करने की मांग को अतिरिक्त उपायुक्त के समक्ष रखेंगे। इसके अतिरिक्त, होम गार्ड की कमी पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि स्वीकृत 800 पदों में से 160 पद अभी भी खाली हैं, जो कानून व्यवस्था के लिए एक चुनौती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: दलित कार्यकर्ता प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि SC/ST निवारण बैठकें हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित की जाएं ताकि शिकायतों का त्वरित निपटान हो सके।
प्रश्न 2: जाति प्रमाण पत्र संबंधी मुख्य समस्या क्या है?
उत्तर: आदि द्रविड़ समुदाय के लोगों को सरकार द्वारा उप-जातियों को अधिसूचित करने के बाद भी प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।