केन्द्र सरकार ने फिर से मदुरै और कोयंबटूर के मेट्रो रेल परियोजनाओं को अस्वीकृत कर दिया। जनसंख्या मानदंड और बजट को लेकर राज्य सरकार ने पुनः समीक्षा की मांग की। यह विवाद दक्षिण भारत के शहरी विकास को प्रभावित कर रहा है।
मुख्य बिंदु
- केन्द्र सरकार ने मदुरै‑कोयंबटूर मेट्रो योजना को दोबारा निरस्त किया।
- 15 लाख जनसंख्या मानदंड को पूरा न करने का कारण बताया गया।
- राज्य सरकार ने पुनर्मूल्यांकन और जल्दी मंजूरी का अनुरोध किया।
परियोजना का सारांश
तमिलनाडु सरकार ने कोयंबटूर (39 किमी) और मदुरै (31.93 किमी) में मेट्रो रेल लागू करने की विस्तृत योजना प्रस्तुत की। कोयंबटूर में 23 स्टेशन और 4.65 किमी भूमिगत भाग, जबकि मदुरै में 23 स्टेशन और 3 भूमिगत स्टेशन तय किए गए थे। कुल लागत क्रमशः 10,740 करोड़ और 11,360 करोड़ रुपये थी।
केन्द्र सरकार ने पिछले वर्ष नवंबर में जनसंख्या कारणों से इन योजनाओं को वापस भेजा था। मेट्रो परियोजना के लिए न्यूनतम 20 लाख जनसंख्या आवश्यक है, जबकि कोयंबटूर और मदुरै में केवल 15 लाख ही आबादी है। इस कारण से प्रस्ताव को अस्वीकृत किया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2000 के दशक से ही तमिलनाडु में मेट्रो के लिए कई बार प्रस्ताव पेश किए गए। 2011 की जनगणना के आधार पर कई परियोजनाओं को स्थगित कर दिया गया था। पिछले कुछ वर्षों में चेन्नई की मेट्रो सफलता के बाद भी कोयंबटूर‑मदुरै को समान मानदंड नहीं मिला।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि मेट्रो न मिलने से दक्षिणी भारत के प्रमुख व्यापार‑पर्यटन केंद्रों की लॉजिस्टिक लागत बढ़ेगी और भीड़भाड़ के मुद्दे बने रहेंगे। इसके अतिरिक्त, बजट आवंटन की अनिश्चितता निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
"जनसंख्या मानदंड को लचीला करने से कई छोटे‑शहरों में आर्थिक विकास की गति तेज़ हो सकती है," कहते हैं शहरी परिवहन विशेषज्ञ डॉ. आर. कृष्णन।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मेट्रो योजना के लिए किन शर्तों को पूरा करना आवश्यक है?
उत्तर: न्यूनतम 20 लाख जनसंख्या, आर्थिक व्यवहार्यता और पर्यावरणीय मंजूरी।
प्रश्न 2: राज्य सरकार ने पुनः समीक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: उन्होंने अद्यतन जनसंख्या आँकड़े और संशोधित लागत अनुमान के साथ केंद्र को नई प्रस्तावना भेजी है।