पट्टली मक्कल कत्ची (PMK) अध्यक्ष अन्बुमणि रामदास ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को कर्नाटक के साथ मेकेडातु बांध मुद्दे पर बातचीत न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए।

मुख्य बातें

  • अन्बुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री विजय को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से बातचीत न करने की सलाह दी।
  • PMK नेता ने सुझाव दिया कि तमिलनाडु सरकार को मेकेडातु बांध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए।
  • केंद्र सरकार ने कहा कि कर्नाटक को बांध निर्माण के लिए अन्य राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है।
  • अन्बुमणि ने एक शक्तिशाली कौवेरी प्रबंधन बोर्ड की स्थापना की मांग की।

पट्टली मक्कल कत्ची (PMK) के अध्यक्ष डॉ. अन्बुमणि रामदास ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को मेकेडातु बांध के मुद्दे पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या चर्चा में शामिल नहीं होना चाहिए। रामदास का तर्क है कि चूंकि तमिलनाडु ने अभी तक इस बांध के निर्माण को स्वीकार ही नहीं किया है, इसलिए कर्नाटक जाकर इस पर बात करने का कोई औचित्य नहीं है।

रामदास ने जोर देकर कहा कि मेकेडातु का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाई का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और किसानों के संघों की आवाज को राज्य की आधिकारिक स्थिति बनाना चाहिए। इसके बाद, तमिलनाडु को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए और मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में ले जाना चाहिए।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मेकेडातु बांध विवाद केवल पानी के बंटवारे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आगामी 2028 विधानसभा चुनावों से पहले कर्नाटक में राजनीतिक ध्रुवीकरण का एक उपकरण भी बन गया है। यदि तमिलनाडु सरकार बातचीत के रास्ते पर चलती है, तो इसे अनजाने में कर्नाटक के निर्माण प्रस्ताव को मान्यता देने के रूप में देखा जा सकता है।

"मेकेडातु के मुद्दे पर बातचीत करना कर्नाटक के दावों को मौन स्वीकृति देने जैसा हो सकता है; कानूनी रास्ता ही एकमात्र विकल्प है।"

इस बीच, केंद्र सरकार का रुख भी विवाद को हवा दे रहा है। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, कर्नाटक को बांध निर्माण के लिए तमिलनाडु, केरल या पुडुचेरी की सहमति लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अन्बुमणि रामदास ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह केंद्र का रुख पूर्ववर्ती सरकारों के रुख के बिल्कुल विपरीत है।

क्या आप जानते हैं?: कौवेरी नदी विवाद दशकों पुराना है, जिसमें तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जल अधिकारों को लेकर निरंतर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष जारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. अन्बुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री को कर्नाटक जाने से क्यों मना किया?
उनका मानना है कि बातचीत करने से मेकेडातु बांध के निर्माण को अनौपचारिक मान्यता मिल सकती है, जबकि तमिलनाडु ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया है।

2. केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
केंद्र के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कर्नाटक को अन्य राज्यों की सहमति के बिना बांध निर्माण का अधिकार है।