NEET घोटाले के खिलाफ आंदोलन करने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अब पंजाब और झारखंड में हुए पेपर लीक मामलों पर मौन क्यों है? राजनीतिक गलियारों में इसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य बातें
- NEET मामले में सक्रिय रहने वाली CJP, पंजाब और झारखंड के पेपर लीक पर चुप है।
- भाजपा सांसद स्वाति मालीवाल ने CJP पर AAP की 'बी टीम' होने का आरोप लगाया है।
- पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पेपर लीक के आरोप एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन रहे हैं।
- झारखंड में JPSC अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तारी और जांच जारी है, लेकिन CJP की कोई प्रतिक्रिया नहीं है।
हाल ही में NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब विवादों के घेरे में है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि जो संगठन परीक्षा संबंधी विफलताओं के लिए जवाबदेही की मांग को अपनी पहचान मानता है, वह पंजाब और झारखंड में हो रहे पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर अचानक शांत क्यों हो गया है?
पक्षपात के आरोप और राजनीतिक टकराव
CJP की इस चुनिंदा सक्रियता ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। भाजपा राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि CJP असल में आम आदमी पार्टी (AAP) की 'बी टीम' के रूप में काम कर रही है। मालीवाल का दावा है कि CJP केंद्र सरकार को निशाना बनाने के लिए आक्रामक है, लेकिन पंजाब में AAP सरकार से जुड़े पेपर लीक के आरोपों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है।
BozokMedia विश्लेषण: क्या यह केवल छात्र आंदोलन है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि CJP की विश्वसनीयता अब उसके 'चुनिंदा विरोध' के कारण दांव पर है। जहां एक ओर NEET मामले में इसके संस्थापकों, अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरव दास ने देशव्यापी दबाव बनाया, वहीं पंजाब में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और झारखंड में JPSC घोटाले पर इनकी चुप्पी संदिग्ध नजर आती है।
किसी भी छात्र संगठन की ताकत उसकी निष्पक्षता में होती है; यदि विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए है, तो वह अपना नैतिक आधार खो देता है।
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पेपर लीक के आरोपों को खारिज किया है, लेकिन विपक्ष का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में कई बड़ी परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। चूंकि पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ये आरोप युवाओं के बीच सरकार की साख को प्रभावित कर सकते हैं।
झारखंड में संस्थागत विफलता
झारखंड में स्थिति और भी गंभीर है। वहां झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले में CID ने एक पूर्व डिप्टी परीक्षा नियंत्रक सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं और पूरी प्रक्रिया बाधित हुई है, फिर भी CJP ने इस पर कोई विरोध प्रदर्शन या मांग नहीं उठाई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. CJP पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
CJP पर आरोप है कि वह केवल केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ती है और पंजाब जैसे राज्यों में विपक्षी सरकारों के खिलाफ चुप रहती है।
2. झारखंड में क्या मामला चल रहा है?
झारखंड में JPSC परीक्षाओं में धांधली के कारण CID जांच कर रही है और कई अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है।