अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के वितरण में हितों के टकराव के आरोपों पर सरकार ने सफाई दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित रही है।
मुख्य बातें
- RDI फंड के चयन पैनल में कुछ सदस्यों के निजी निवेश के सवाल उठे थे।
- सरकार ने कहा कि हितों के टकराव की नीति का सख्ती से पालन किया गया है।
- संबंधित सदस्यों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से अलग रखा गया था।
- टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है।
नई दिल्ली: अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के तहत कंपनियों के चयन को लेकर उठे विवादों पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया है। राज्यसभा सांसद प्रवीण चक्रवर्ती द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में यह स्पष्टीकरण दिया गया है, जिसमें चयन पैनल के सदस्यों के निजी निवेश को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।
हाल ही में यह जानकारी सामने आई थी कि एक चयन पैनल के 11 में से 7 सदस्यों का उन कंपनियों में व्यक्तिगत निवेश था, जिन्हें RDI फंड प्राप्त करने के लिए चुना गया था। इस खुलासे के बाद सरकार पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जब सरकारी धन का वितरण नवाचार और अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है, तो चयन प्रक्रिया की शुचिता अत्यंत आवश्यक होती है। यदि चयन प्रक्रिया में हितों का टकराव होता है, तो यह न केवल देश के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र (Research Ecosystem) को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का संदेह भी पैदा करता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी ऐसे सदस्य ने मूल्यांकन में भाग नहीं लिया जिसका उस कंपनी में वित्तीय हित था।
मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) के पास एक व्यापक और मजबूत 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) की नीति है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से योग्यता (Merit) पर आधारित थी और सभी संभावित हितों का पहले ही खुलासा कर दिया गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत सरकार ने देश में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए RDI फंड की स्थापना की है। इस फंड का उद्देश्य स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या पैनल सदस्यों के निवेश से चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई?
मंत्रालय के अनुसार, नहीं। जिन सदस्यों का निवेश था, उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग (Recusal) रखा गया था।
2. हितों के टकराव की नीति क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत यदि किसी निर्णय लेने वाले व्यक्ति का किसी कंपनी में वित्तीय हित है, तो उसे उस निर्णय में शामिल होने से रोक दिया जाता है।