तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष मनिकम टैगोर ने कहा है कि कावेरी जल विवाद को सुलझाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने पीएमके नेता अंबूमणि रामदास के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
मुख्य बिंदु
- मनिकम टैगोर ने कहा कि कावेरी विवाद सुलझाना पीएम मोदी की जिम्मेदारी है।
- पीएमके नेता अंबूमणि रामदास ने राहुल गांधी पर मेकेडातु बांध का विरोध न करने का आरोप लगाया था।
- कांग्रेस ने तमिलनाडु के हितों और जल अधिकार के लिए अडिग रहने का दावा किया।
- कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को पानी छोड़ने का आदेश दिया है।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष और विरुधुनगर के सांसद बी. मनिकम टैगोर ने शुक्रवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहे कावेरी जल विवाद का समाधान करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कर्तव्य और जिम्मेदारी है। टैगोर ने यह प्रतिक्रिया पीएमके (PMK) अध्यक्ष अंबूमणि रामदास के उन आरोपों के बाद दी, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर मेकेडातु बांध परियोजना को रद्द करवाने के लिए कदम न उठाने का आरोप लगाया था।
राजनीतिक टकराव और मेकेडातु विवाद
अंबूमणि रामदास ने संकेत दिया था कि यदि राहुल गांधी मेकेडातु बांध के निर्माण का विरोध नहीं करते हैं, तो वह भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन छोड़ देंगे। इस पर पलटवार करते हुए टैगोर ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने के बाद इन सवालों का जवाब देने की आवश्यकता है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में, केंद्र सरकार के पास इस मुद्दे पर निर्णय लेने की शक्ति है।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, कावेरी विवाद केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत की कृषि और राजनीति की जीवनरेखा है। कम बारिश के कारण इस वर्ष तमिलनाडु में पानी की भारी कमी देखी गई है। कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक सरकार को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया है, लेकिन इसका कार्यान्वयन अब भी एक चुनौती बना हुआ है।
कावेरी जल विवाद का समाधान केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति और केंद्र के सक्रिय हस्तक्षेप से ही संभव है।
टैगोर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वार्ता करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जल विनियमन समिति के आदेशों का पालन हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु के लोग प्रधानमंत्री की निष्क्रियता से निराश हैं और कांग्रेस हमेशा राज्य के जल अधिकारों के लिए आवाज उठाएगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कावेरी नदी विवाद दशकों पुराना है, जिसमें तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जल बंटवारे को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष चलता रहता है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के बावजूद, मेकेडातु बांध जैसे नए प्रोजेक्ट्स इस विवाद को और अधिक जटिल बना रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. मेकेडातु बांध विवाद क्या है?
यह कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर बांध बनाने की योजना है, जिसका तमिलनाडु विरोध करता है क्योंकि इससे उसके जल अधिकारों पर असर पड़ेगा।
2. कावेरी जल विनियमन समिति का क्या कार्य है?
यह समिति जल बंटवारे के विवादों को सुलझाने और राज्यों के बीच पानी के प्रवाह को विनियमित करने के लिए आदेश जारी करती है।