जॉर्ज मोनबियट के अनुसार, दुनिया भर में अरबपति और कॉर्पोरेट लॉबी हमारे मौलिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला कर रहे हैं। क्या हम एक नए अधिनायकवादी युग की ओर बढ़ रहे हैं?

मुख्य बातें

  • दुनिया भर में कॉर्पोरेट लॉबिंग और अरबपतियों द्वारा नागरिक स्वतंत्रता पर हमला तेज हो रहा है।
  • अमेरिका और यूके में विरोध प्रदर्शनों और कानूनी अधिकारों को सीमित करने के नए कानून लाए जा रहे हैं।
  • न्यायपालिका और जूरी प्रणाली को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं।

प्रसिद्ध लेखक जॉर्ज मोनबियट ने एक गंभीर चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर हमारी स्वतंत्रता पर हमला अब हमारे दरवाजे तक पहुंच गया है। यह हमला किसी बाहरी दुश्मन से नहीं, बल्कि उन अरबपतियों और कॉर्पोरेट घरानों से है जो अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहे हैं।

अधिनायकवाद का नया मॉडल

मोनबियट विश्लेषण करते हैं कि कैसे अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के अधिकारी अब आतंकवाद विरोधी प्रयासों को 'इस्लामिक जिहाद' से हटाकर 'राजनीतिक वामपंथ' की ओर मोड़ रहे हैं। बिना किसी ठोस सबूत के, असहमति जताने वाले पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और राजनेताओं को दुश्मन के रूपas चित्रित किया जा रहा है। यह वही पुरानी नाजी रणनीति है जहाँ असंतुष्टों को एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा बताकर कुचल दिया जाता है।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह कानूनी ढांचे को बदलने का एक सुनियोजित प्रयास है। जब सरकारें 'सामान्य दिखने वाले' लोगों और 'असामान्य दिखने वाले' प्रदर्शनकारियों के बीच अंतर करने लगती हैं, तो समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है।

असहमति को अपराध घोषित करना अधिनायकवाद की पहली सीढ़ी है।

यूके में वकील राजीव मेनन KC का मामला इसका ज्वलंत उदाहरण है। उन्हें अदालत की अवमानना के लिए अभियोजित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने जूरी को उनके संवैधानिक अधिकारों की याद दिलाई थी। यदि वकीलों को उनके मुवक्किलों का बचाव करने के लिए जेल भेजा जाने लगा, तो न्याय की अवधारणा ही समाप्त हो जाएगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इतिहास गवाह है कि जब भी सत्ता केंद्रित हुई है, सबसे पहले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र न्यायपालिका पर हमला किया गया है। 20वीं सदी के फासीवादी शासकों ने भी इसी तरह के 'आतंकवाद' के व्यापक और अस्पष्ट परिभाषाओं का उपयोग करके नागरिक विरोध को कुचला था।

क्या आप जानते हैं?: 'जूरी नलिफिकेशन' (Jury Nullification) एक कानूनी सिद्धांत है जो जूरी को किसी आरोपी को बरी करने का अधिकार देता है यदि वे मानते हैं कि कानून स्वयं अन्यायपूर्ण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कॉर्पोरेट लॉबिंग हमारे अधिकारों को कैसे प्रभावित करती है?

कॉर्पोरेट समूह 'मॉडल कानून' बनाने के लिए धन का उपयोग करते हैं, जिन्हें बाद में विभिन्न देशों में अपनाया जाता है ताकि विरोध प्रदर्शनों को रोका जा सके।

2. क्या यूके में विरोध प्रदर्शनों पर नए प्रतिबंध लागू हैं?

हाँ, नए कानूनों के तहत पुलिस को उन प्रदर्शनों को रोकने की शक्ति दी गई है जिनका समुदाय पर 'संचयी प्रभाव' (cumulative impact) पड़ता है।