सामाजिक कल्याण मंत्री अदुलुरी लक्ष्मण कुमार ने कहा कि येल्लामपल्ली जलाशय का पूर्ण क्षमता तक पहुंचना कांग्रेस की दूरदर्शी योजना का प्रमाण है। उन्होंने बीआरएस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह परियोजना प्राकृतिक रूप से सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

मुख्य बातें

  • येल्लामपल्ली जलाशय अपने पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) पर पहुंच गया है।
  • मंत्री अदुलुरी ने कहा कि यह पूर्व कांग्रेस सरकारों की वैज्ञानिक योजना का परिणाम है।
  • बीआरएस द्वारा पंपिंग की आवश्यकता के दावों को गलत साबित किया गया है।
  • सरकार अब मिड मानैर और लोअर मानैर जैसे डाउनस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स में पानी छोड़ने के लिए तैयार है।

हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सामाजिक कल्याण मंत्री अदुलुरी लक्ष्मण कुमार ने घोषणा की कि श्रीपाद येल्लामपल्ली जलाशय भारी बाढ़ के प्रवाह के कारण अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंच गया है। उन्होंने इस सफलता को पूर्व कांग्रेस सरकारों की दीर्घकालिक और वैज्ञानिक योजना की जीत बताया और भारत राष्ट्र समिति (BRS) द्वारा फैलाए गए 'झूठे नैरेटिव' का खंडन किया।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि येल्लामपल्ली परियोजना, जिसे स्वर्गीय मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल के दौरान डिजाइन किया गया था, एक वैज्ञानिक गुरुत्वाकर्षण-आधारित बाढ़ नहर नेटवर्क के साथ बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि जलाशय का प्राकृतिक रूप से भरना यह साबित करता है कि भविष्य की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महंगे लिफ्टिंग या पंपिंग तंत्र की आवश्यकता नहीं है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना तेलंगाना की राजनीति में सिंचाई परियोजनाओं के स्वामित्व को लेकर एक बड़ा मोड़ है। जहाँ बीआरएस ने पंपों के संचालन की मांग कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की, वहीं जलाशय का प्राकृतिक रूप से भरना कांग्रेस के लिए एक तकनीकी और राजनीतिक जीत के रूप में उभरा है।

यह जलाशय का प्राकृतिक रूप से भरना केवल मानसून की सफलता नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के इंजीनियरिंग विजन की जीत है।

अदुलुरी लक्ष्मण कुमार ने बीआरएस नेताओं के.टी. रामा राव और टी. हरीश राव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कन्नपेल्ली पंप हाउस में मोटरों के उपयोग को लेकर गलत दावे किए थे। उन्होंने कहा कि जलाशय के प्राकृतिक रूप से भरने से यह स्पष्ट हो गया है कि पंपिंग अनिवार्य नहीं थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तेलंगाना में सिंचाई का इतिहास बड़े बांधों और परियोजनाओं से जुड़ा है। कांग्रेस ने नागार्जुन सागर, श्रीशैलम, श्री राम सागर और येल्लामपल्ली जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव रखी थी। वर्तमान में, सरकार इन बुनियादी ढांचों को मजबूत करने और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

क्या आप जानते हैं?: येल्लामपल्ली परियोजना को विशेष रूप से गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रणाली के रूप में डिजाइन किया गया था ताकि बिजली की लागत कम की जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: येल्लामपल्ली जलाशय का महत्व क्या है?
उत्तर: यह उत्तरी तेलंगाना में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है।

प्रश्न 2: मंत्री ने बीआरएस पर क्या आरोप लगाए?
उत्तर: मंत्री ने आरोप लगाया कि बीआरएस ने सिंचाई की जरूरतों के बारे में गलत सूचना फैलाई और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई।