सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने गोदावरी के जल स्तर की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के लाभ के लिए पानी के हर कतरे का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कालेश्वरम परियोजना से जुड़े दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया।

मुख्य बातें

  • सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने श्रीरामसागर, कडम और येलामपल्ली परियोजनाओं का निरीक्षण किया।
  • सरकार का लक्ष्य गोदावरी के पानी का इष्टतम उपयोग करना और सिंचाई क्षमता बढ़ाना है।
  • कालेश्वरम बैराजों में संरचनात्मक समस्याओं के कारण मरम्मत कार्य जारी है।
  • मंत्री ने पिछले शासन के दावों को खारिज करते हुए कांग्रेस-युग की परियोजनाओं की विश्वसनीयता पर जोर दिया।

तेलंगाना के सिंचाई और नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने शनिवार को महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं का दौरा किया। उनके साथ कैबिनेट सहयोगी श्रीधर बाबू, विवेक और लक्ष्मण कुमार भी मौजूद थे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य गोदावरी नदी के बढ़ते जल स्तर और परियोजनाओं में पानी के प्रवाह की समीक्षा करना था।

मंत्री रेड्डी ने स्पष्ट किया कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य गोदावरी के पानी का हर बूंद का उपयोग किसानों के लाभ के लिए करना है। उन्होंने बताया कि नंदी मेदारम पंप हाउस में पांच पंप चालू किए गए हैं, जो येलामपल्ली जलाशय से गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से मिड मानैर को भरने के लिए पानी खींच रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए परियोजनाओं के संचालन की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, तेलंगाना में जल प्रबंधन और सिंचाई परियोजनाओं की स्थिरता राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कालेश्वरम परियोजना के बैराजों की मरम्मत और गोदावरी के प्राकृतिक प्रवाह का प्रबंधन न केवल भविष्य की फसल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह राज्य की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।

"हमारा लक्ष्य गोदावरी के पानी के हर कतरे का इष्टतम उपयोग करना है ताकि किसानों को लाभ मिल सके।" - उत्तम कुमार रेड्डी

मंत्री ने कालेश्वरम परियोजना के पानी को लेकर हो रहे राजनीतिक दावों का कड़ा खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि येलामपल्ली से पंप किया जा रहा पानी 'कालेश्वरम का पानी' नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस शासन के दौरान शुरू की गई प्रणाहिता चेवेला परियोजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में येलामपल्ली में आने वाला पानी गोदावरी का प्राकृतिक प्रवाह है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मंत्री ने उल्लेख किया कि श्रीरामसागर (SRSP), जो 1963 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा नींव रखी गई थी, और कडम जैसे बड़े प्रोजेक्ट कांग्रेस काल के दौरान बनाए गए थे और आज भी राज्य की सेवा कर रहे हैं। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले बीआरएस शासन के दौरान बने मेडगड्डा और अन्नाराम जैसे बैराजों में संरचनात्मक दोष पाए गए हैं, जिनकी मरम्मत के लिए विशेषज्ञों की देखरेख में काम चल रहा है।

क्या आप जानते हैं?: श्रीरामसागर परियोजना (SRSP) की आधारशिला भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, जो दशकों से तेलंगाना की सिंचाई का मुख्य स्रोत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या कालेश्वरम बैराजों में कोई समस्या है?
हाँ, विशेषज्ञों ने मेडगड्डा और अन्नाराम जैसे बैराजों में संरचनात्मक दोषों की पहचान की है, जिनकी मरम्मत के लिए राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

2. सरकार मरम्मत कार्य के लिए क्या कदम उठा रही है?
IIT बॉम्बे और AFRY इंडिया जैसे विशेषज्ञ संस्थान मरम्मत के डिजाइन तैयार कर रहे हैं, जिसमें डायफ्राम वॉल का निर्माण शामिल है।