झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। प्रदर्शनकारी अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे और मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • JPSC और JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ रांची में पांच दिनों से धरना जारी।
  • छात्रों ने मामले की CBI और ED द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग की है।
  • 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और OMR शीट में सुधार की मांग।
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ नारेबाजी और इस्तीफे की मांग।

झारखंड की राजधानी रांची में छात्र आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के खिलाफ सैकड़ों छात्र पिछले पांच दिनों से रांची के एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 19 अप्रैल को आयोजित 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा में भारी धांधली हुई है। छात्रों का कहना है कि केवल राज्य की CID जांच पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उन्हें डर है कि राज्य सरकार जांच को दबा सकती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में बार-बार होने वाली अनियमितताएं न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक साख को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं। यदि इन धांधलियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो राज्य में युवाओं का सरकारी तंत्र से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है।

"हम राज्य की CID जांच पर भरोसा नहीं कर सकते; हमें एक निष्पक्ष केंद्रीय जांच की आवश्यकता है ताकि दोषियों को सजा मिल सके।" - राहुल कुमार क्रांति, JPSC अभ्यर्थी।

छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए तकनीकी बदलावों की भी मांग की है, जिसमें OMR शीट में 'प्रयास नहीं किया गया' (not attempted) का पांचवां विकल्प शामिल है। गिरिडीह के छात्र अंकित कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि अधिकांश छात्र किसान परिवारों से आते हैं और भ्रष्टाचार उनके सपनों को कुचल रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

झारखंड में पिछले सात वर्षों में कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। JSSC-CGL परीक्षा के दौरान हुए विवादों ने पहले भी राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।

क्या आप जानते हैं?: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की एक बड़ी आबादी ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आती है, जिनके लिए ये नौकरियां जीवन बदलने का एकमात्र जरिया हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. छात्र किस जांच की मांग कर रहे हैं?
छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली की CBI और ED द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

2. प्रदर्शनकारी मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा का रद्द होना, भर्ती प्रक्रिया में सुधार और दोषियों पर सख्त कार्रवाई शामिल है।