ड्रविड़ मुन्नेतर कड़ग़म (DMK) के सांसद पी. विल्सन ने कांग्रेस को तमिलनाडु की जल समस्या को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाते हुए कावेरी जल के हिस्से के denial के खिलाफ दोनों सदनों में वॉक‑आउट किया। राज्य ने अभी तक 2026 में एक भी बूंद नहीं प्राप्त की, जिससे सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका भी बढ़ गई।

मुख्य बिंदु

  • DMK ने दोनों सदनों में कावेरी जल के वितरण को लेकर वॉक‑आउट किया
  • राज्य ने 2026 में 42 टीएमसी जल का कोई हिस्सा नहीं पाया
  • MP पी. विल्सन ने कांग्रेस को इस मुद्दे से दूर रहने का आरोप लगाया

ड्रविड़ मुन्नेतर कड़ग़म (DMK) के सांसद पी. विल्सन ने सोमवार को राजसभा और लोकसभा दोनों में कावेरी जल वितरण को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को जल अधिकार के अनुबंध के अनुसार 9.9 टीएमसी जून में और 32 टीएमसी जुलाई में मिलना चाहिए, लेकिन 2026 में अब तक एक भी बूंद नहीं पहुँची।

विल्सन ने संसद में यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनदेखा कर रही है और केवल अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर ही चर्चा कर रही है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस तमिलनाडु की समस्याओं से अनभिज्ञ है, इसलिए हमें यह मुद्दा संघीय सरकार के समक्ष लाना पड़ा।"

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कावेरी जल विवाद दशकों से भारत-तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा है। 2007 में स्थापित कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने जल आवंटन के लिए 42 टीएमसी वार्षिक सीमा तय की, लेकिन जल वितरण में लगातार देरी और अनियमितता ने दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। पिछले कई सालों में सुप्रीम कोर्ट ने कई आदेश जारी किए, फिर भी व्यावहारिक रूप से जल वितरण में सुधार नहीं हुआ।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि कावेरी जल की कमी से तमिलनाडु के कृषि उत्पादन, जलाशयों की भराई और ग्रामीण जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। यदि जल अधिकारों का निराकरण नहीं हुआ, तो राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता दोनों जोखिम में पड़ सकते हैं।

"कावेरी जल का न्यायसंगत वितरण न केवल जल सुरक्षा बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी अत्यंत आवश्यक है," जल नीति विशेषज्ञ डॉ. रमन सिंह ने कहा।
क्या आप जानते हैं?: कावेरी नदी का कुल जल प्रवाह लगभग 740 टेसिला क्यूबिक मीटर है, जो भारत के सबसे बड़े नदी जल विवादों में से एक बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • कावेरी जल विवाद का वर्तमान स्थिति क्या है? 2026 में तमिलनाडु ने अभी तक कोई जल नहीं प्राप्त किया, जबकि राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
  • DMK ने संसद में कौन-से कदम उठाए? दोनों सदनों में वॉक‑आउट किया, प्लैकार्ड पकड़े, और जल मुद्दे पर बहस और रिज़ॉल्यूशन की मांग की।