प्रशांत किशोर ने संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आठ साल काम किया, फिर रणनीतिकार बनकर भारत की प्रमुख पार्टियों को जीत दिलाई और 2026 में जनसुराज पार्टी के साथ अपनी पहली जीत हासिल की। उनका करियर अंतरराष्ट्रीय विकास से भारतीय राजनीति तक का अद्वितीय सफर दर्शाता है।
मुख्य बिंदु
- प्रशांत किशोर ने 8 साल यूएन के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोग्राम में काम किया
- उनकी रिपोर्ट ने नरेंद्र मोदी को प्रभावित किया और राजनीतिक करियर का मार्ग खोला
- 2026 में बँकिपुर उपचुनाव में जीत कर जनसुराज पार्टी ने पहली जीत हासिल की
प्रशांत किशोर, जो आज भारत के सबसे प्रसिद्ध चुनाव रणनीतिकारों में से एक हैं, का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गाँव में हुआ। उनके पिता सरकारी चिकित्सक और माता गृहिणी थे। शुरुआती शिक्षा बक्सर में हुई, बाद में उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, परन्तु सार्वजनिक नीति में उनका रुचि आगे बढ़ी।
संयुक्त राष्ट्र में आठ वर्ष
किशोर ने लगभग आठ साल संयुक्त राष्ट्र‑समर्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में काम किया, मुख्यतः अफ्रीका में। वे चाड में यूनीसेफ के सामाजिक नीति एवं योजना प्रमुख थे, जहाँ उन्होंने पोषण, बाल कल्याण और विकास योजना पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि और कुपोषण पर एक पेपर तैयार किया, जो प्रधानमंत्री कार्यालय और फिर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँचा।
राजनीतिक रणनीति की ओर बदलाव
2011 में वह भारतीय राजनीति में आए और 2012 में नरेंद्र मोदी की गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रमुख सलाहकार बन गए। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) की स्थापना की, जिसने 'चाय पे चर्चा' और 3D रैली जैसी नवाचारी अभियानों को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने भारतीय पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I‑PAC) की स्थापना की, जो विभिन्न पार्टियों को रणनीतिक सलाह देती रही।
राजनीति में प्रत्यक्ष भागीदारी
2018 में वह जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने, पर 2020 में अलग हो गए। 2022 में उन्होंने 'जन सुराज पदयात्रा' शुरू की और 2024 में जनसुराज पार्टी का गठन किया। 2026 के बँकिपुर विधानसभा बायपोल में उनकी जीत ने पार्टी को 35 साल से चल रहे बीजेपी के राज को तोड़ने में मदद की।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि किशोर का अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुभव उनके चुनावी डेटा‑ड्रिवेन रणनीतियों को अनूठा बनाता है, जिससे भारतीय राजनीति में नई पेशेवर मानक स्थापित हो रहे हैं।
"किशोर का स्वास्थ्य‑सेवा पृष्ठभूमि उन्हें सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ देता है, जो आज के वोटर‑केंद्रित राजनीति में अनिवार्य है," कहा गया एक राजनीतिक विज्ञान प्रोफेसर ने।
Frequently Asked Questions
प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता कौन सी रही? बँकिपुर विधानसभा बायपोल में 2026 की जीत, जहाँ उन्होंने बीजेपी को हराया।
क्या उनका भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी बनाना संभव है? कई विशेषज्ञ मानते हैं कि उनके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और रणनीतिक कौशल से यह संभव है।