संसद के मॉनसून सत्र में छात्र प्रदर्शनों पर कथित बर्बरता और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर गतिरोध बरकरार है। विपक्ष, राहुल गांधी के नेतृत्व में, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से जवाब और तत्काल चर्चा की मांग कर रहा है, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को अपनी भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी।
मुख्य बातें
- संसद का मॉनसून सत्र छात्र आंदोलन और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों पर हंगामे के कारण बाधित है।
- विपक्ष, राहुल गांधी के नेतृत्व में, गृहमंत्री अमित शाह से जवाब और दोनों मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहा है।
- भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी की 'विकासहीन राजनीति' और 'झारखंड पेपर लीक पर चुप्पी' की आलोचना की।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नव निर्वाचित सांसदों को संसद की लाइब्रेरी में समय बिताने और युवा जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
नई दिल्ली: भारतीय संसद का मॉनसून सत्र 2026 लगातार दूसरे दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी दलों द्वारा जोरदार नारेबाजी के कारण कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष मुख्य रूप से छात्र प्रदर्शनों पर कथित बर्बरता और अयोध्या में राम मंदिर के लिए चढ़ावे की चोरी के आरोपों पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है।
संसद सत्र की शुरुआत से पहले, विपक्ष के नेताओं ने, जिनमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे, संसद परिसर में गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। इस दौरान, राहुल गांधी ने छात्र आंदोलनों में पैलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सदन में आकर जवाब देने की मांग की। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गतिरोध समाप्त करने के लिए राहुल गांधी से मुलाकात की, जहां राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'बिना चर्चा के सदन नहीं चलने देंगे।'
मंगलवार को भी राम मंदिर में 'चढ़ावा चोरी' का मुद्दा दोनों सदनों में छाया रहा। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और केंद्र सरकार से मामले में ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर जवाब मांगा है। यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब मंदिर निर्माण को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय संसदीय इतिहास में मॉनसून सत्र अक्सर महत्वपूर्ण बहस और कभी-कभी तीखे गतिरोध के लिए जाना जाता है। देश के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बहस और असहमति लोकतंत्र का एक अभिन्न अंग है। हालांकि, लगातार स्थगन से विधायी कार्यों पर असर पड़ता है, जिससे महत्वपूर्ण बिलों और चर्चाओं में देरी होती है।
क्यों यह मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि संसदीय कार्यवाही में लगातार बाधाएँ न केवल महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को बाधित करती हैं, बल्कि जनता के बीच संसद की कार्यप्रणाली के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष बातचीत और बहस के माध्यम से मुद्दों का समाधान करें, बजाय इसके कि सदन को लगातार बाधित किया जाए, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
“संसद में सार्थक बहस और चर्चा किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आधारशिला है, और गतिरोध से बचना राष्ट्र के हित में है।”
इस बीच, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास न विकास की कोई योजना है, न कोई दृष्टि और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी पर 'छात्र आंदोलनों पर मगरमच्छ के आंसू बहाने' और झारखंड में पेपर लीक की घटना पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया, साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर उनके लगातार हमलों की निंदा की।
गतिरोध के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए सांसदों के साथ नाश्ते पर मुलाकात की। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सांसदों को प्रतिदिन कम से कम एक से दो घंटे संसद की लाइब्रेरी में बिताने की सलाह दी, ताकि वे विभिन्न विषयों का अध्ययन कर अपनी संसदीय भूमिका को और प्रभावी बना सकें। उन्होंने सांसदों से युवाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने और अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में सांसद खेल योजना को सक्रिय रूप से लागू करने का भी आग्रह किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. संसद के मॉनसून सत्र में गतिरोध के मुख्य कारण क्या हैं?
वर्तमान गतिरोध के मुख्य कारण छात्र प्रदर्शनों पर कथित बर्बरता और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप हैं, जिन पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है।
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को क्या सलाह दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को प्रतिदिन एक से दो घंटे संसद की लाइब्रेरी में बिताने, युवाओं के साथ संवाद बनाए रखने और अपने क्षेत्रों में सांसद खेल योजना को सक्रिय रूप से लागू करने की सलाह दी।